रूसी ऊर्जा संसाधनों के आयात पर 100 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगाने संबंधी अमेरिकी संसद के नए विधेयक ‘सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ के खिलाफ चीन ने मुखर विरोध दर्ज कराया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने इस विधायी पहल का खंडन करते हुए कहा कि ऐसे कदमों का अंतरराष्ट्रीय विधि में कोई वैधानिक आधार नहीं है और वॉशिंगटन को अन्य राष्ट्रों के मामलों में दखल देना बंद करना चाहिए।
माइक्रोब्लॉगिंग मंच ‘एक्स’ पर जारी एक बयान में चीनी विदेश मंत्रालय ने जोर दिया कि अन्य देशों के साथ बीजिंग का आर्थिक और कारोबारी तालमेल पूरी तरह से निष्पक्षता और आपसी हित के सिद्धांतों पर आधारित है। यह सामान्य सहयोग किसी तीसरे पक्ष के विरोध में नहीं है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की रुकावट या दबाव स्वीकार्य नहीं होगा। चीन ने दो टूक कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के औपचारिक अनुमोदन के बिना एकतरफा प्रतिबंध थोपना पूरी तरह अनुचित है।
अमेरिकी विधेयक के मसौदे में रूसी उत्पादों पर 500 फीसदी तक प्रशुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, मॉस्को से कच्चा तेल अथवा प्राकृतिक गैस खरीदने वाले राष्ट्रों से आने वाले सामानों पर 100 फीसदी तक शुल्क आयद करने का प्रावधान रखा गया है। इस नीति का मुख्य लक्ष्य यूक्रेन के खिलाफ जारी जंग में रूस को मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को सीमित करना है, जिसके निशाने पर रूसी बैंक, ऊर्जा प्रतिष्ठान, प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित विदेशी संगठन हैं।
अमेरिकी सीनेटर केटी ब्रिट के दफ्तर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कानून में कुछ शर्तों के तहत छूट का भी दायरा निर्धारित है। यह रियायत केवल उन्हीं राष्ट्रों को मिल सकेगी, जिनका रूसी प्राकृतिक गैस आयात रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है और जो भविष्य में इस खरीद को कम करने की दिशा में गंभीर कदम उठा रहे हैं।
यह कानून मुख्य रूप से उन बड़े देशों को प्रभावित करेगा जो बड़े पैमाने पर रूसी ऊर्जा उत्पादों का क्रय कर रहे हैं या तेल पर लगी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को दरकिनार करने में सहयोग दे रहे हैं। संपूर्ण व्यवस्था की निगरानी के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि प्रत्येक 180 दिन के अंतराल पर समीक्षा करेंगे, जिसके आधार पर जरूरत पड़ने पर अन्य देशों को भी इस प्रतिबंध सूची में शामिल करने का विकल्प खुला रहेगा।