न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सम्मेलन के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ (पी4एम) शिखर बैठक की सह-अध्यक्षता की। सम्मेलन में विश्व के मौजूदा हालात का विश्लेषण करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था इस समय गहरे संकट और दबाव के दौर से गुजर रही है, जिससे निपटने के लिए आपसी और बहुपक्षीय साझेदारी को सशक्त बनाना बेहद आवश्यक है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत को इस आयोजन का सह-प्रायोजक बनाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जयशंकर ने प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि पिछले दशकों में दुनिया भर में शक्ति का जो संतुलन बदला है, वह एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी। हालांकि, अनियंत्रित प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक खिंचाव और जारी सैन्य टकरावों ने इस पूरे परिदृश्य को अत्यधिक जटिल बना दिया है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो राष्ट्रों के बीच सहयोग की बुनियादी भावना कमजोर पड़ सकती है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह संकट केवल कागजी बहसों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा सरोकार जमीनी हकीकत और मानव जीवन से है। विश्व शांति और सुरक्षा की रक्षा, जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध ठोस कदम, नई तकनीकों का प्रबंधन, विकास कार्यों के लिए आर्थिक संसाधन, आतंकवाद का खात्मा, मजबूत सप्लाई चेन, आपदा से उबरने की क्षमता और आगामी महामारियों से बचाव जैसे विषय तभी हल हो सकते हैं जब देश एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि अतीत के सामूहिक अनुभवों से सीखते हुए अर्जित सफलताओं की रक्षा करना और उन्हें बेहतर बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि ईंधन, भोजन, खाद और वित्त (4-एफ) से जुड़े संकट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नई तकनीकों और व्यवस्थाओं के लिए ठोस नियम, पारदर्शी रूपरेखा और आवश्यक सुरक्षा मानक तय किए जाने चाहिए। जहां भी महत्वपूर्ण आपूर्ति तंत्र में व्यवधान या एकाधिकार का खतरा हो, वहां जोखिमों को कम करके नए विकल्पों का निर्माण करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून और तय मानकों का गंभीरता से सम्मान करने पर ही बहुपक्षवाद वास्तविक रूप से प्रभावी हो सकता है।
जयशंकर ने कहा कि बहुपक्षीय व्यवस्था को मात्र समर्थन देने के बजाय उसकी कार्यप्रणाली में बुनियादी सुधार करना अनिवार्य है। संयुक्त राष्ट्र में चर्चाओं को अधिक समावेशी बनाने और निर्णयों में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने से ही वैश्विक संस्थाओं में विश्वास की पुनर्स्थापना होगी।
न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान विदेश मंत्री ने अन्य वैश्विक नेताओं से भी भेंट की। ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि यूएनजीए-81 सत्र के दौरान मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई के साथ उपयोगी बैठक हुई, जिसमें द्विपक्षीय राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक संबंधों में प्रगति की समीक्षा की गई तथा यूक्रेन संघर्ष पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अतिरिक्त, हालिया यूक्रेन यात्रा के बाद उन्होंने वहां के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से भी पुनः मुलाकात की, जिसमें विगत कुछ सप्ताहों के घटनाक्रमों पर केंद्रित चर्चा हुई।