संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के उच्च स्तरीय सत्र के औपचारिक आगाज से ठीक एक दिन पहले, सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कई अहम कूटनीतिक बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने फ्रांस और इक्वाडोर के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय चर्चा कर वैश्विक और रणनीतिक विषयों पर भारत का पक्ष साझा किया।
फ्रांसीसी विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो के साथ हुई बैठक का ब्योरा साझा करते हुए विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच लगातार होने वाले संवाद और टेलीकॉन्फ्रेंस से ‘भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ को निरंतर गति मिल रही है।
इस वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के मौजूदा संकट सहित प्रमुख क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर गहन मंथन किया। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में लंबे समय से लंबित सुधारों की आवश्यकता तथा विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर आपसी तालमेल को लेकर भी दोनों पक्षों में विचार-विमर्श हुआ।
उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के समय दोनों देशों ने अपने राजनयिक संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा जारी संयुक्त बयान में यह स्पष्ट किया गया था कि यह साझेदारी आने वाले दशकों में द्विपक्षीय सहयोग का मार्गदर्शन करेगी। इसमें रक्षा क्षेत्र को मजबूती देने के साथ-साथ ऊर्जा के क्षेत्र में संयुक्त विकास को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा गया है।
फ्रांस के बाद डॉ. जयशंकर ने दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के विदेश मंत्री रोबर्टो क्यूरी के साथ औपचारिक बैठक की। इस संवाद में ऊर्जा, दवा निर्माण (फार्मास्यूटिकल्स), लोगों की सुगम आवाजाही, कौशल संवर्धन, विकास साझेदारी और संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग के दायरे को विस्तार देने पर सहमति बनी।
प्रशांत महासागरीय तट पर स्थित तेल संपन्न देश इक्वाडोर के साथ भारत के ये संबंध ‘ग्लोबल साउथ’ (वैश्विक दक्षिण) के साथ साझेदारी बढ़ाने की नीति का अहम हिस्सा हैं। प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स दोनों मुल्कों के बीच व्यापारिक सहयोग के मुख्य आधार स्तंभ हैं। आंकड़ों के अनुसार, बीते पांच वर्षों के दौरान भारत ने इक्वाडोर के 223 पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। इसके अलावा, इक्वाडोर के एक विश्वविद्यालय में भारत द्वारा स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र के जरिए 813 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। भारत से होने वाला औषधीय निर्यात भी दोनों देशों के व्यापार की एक मजबूत कड़ी बना हुआ है।