शेयर बाजार में थमा बढ़त का दौर: सेंसेक्स 330 अंक टूटा, निफ्टी 23,329 के स्तर पर बंद

शेयर बाजार में थमा बढ़त का दौर: सेंसेक्स 330 अंक टूटा, निफ्टी 23,329 के स्तर पर बंद

सप्ताह के दूसरे कारोबारी सत्र में मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में पिछले दिन की तेजी के बाद मुनाफावसूली हावी रही, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली के कारण निफ्टी50 का लगातार चार दिनों से चला आ रहा बढ़त का सिलसिला टूट गया। कारोबार के दौरान बेंचमार्क सूचकांकों में 0.44 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई।

घरेलू शेयर बाजारों में दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 प्रतिशत का गोता लगाकर 74,529.08 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत गिरकर 23,329.00 के स्तर पर बंद हुआ। मुख्य सूचकांकों के साथ व्यापक बाजार भी दबाव में दिखा, जहां निफ्टी मिडकैप में 0.08 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

क्षेत्रीय मोर्चे पर अधिकांश सूचकांक नुकसान में रहे। निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा में सबसे तेज गिरावट देखने को मिली। इसके विपरीत, दबाव भरे माहौल में भी निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सूचकांक बढ़त हासिल करने में कामयाब रहे।

निफ्टी50 के शेयरों में 3.2 प्रतिशत के उछाल के साथ कोल इंडिया शीर्ष लाभ कमाने वाला शेयर साबित हुआ। इसके अलावा इटरनल, इंडिगो, टाइटन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज भी लाभ दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में रहे। दूसरी तरफ, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, नेस्ले इंडिया, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, ग्रासिम, ट्रेंट, आयशर मोटर्स और टीसीएस में सर्वाधिक बिकवाली दर्ज की गई, जिससे ये शेयर दिन के शीर्ष नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे।

बाजार पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों का मिला-जुला असर देखा गया। बीते चार सत्रों की मंदी के उपरांत ब्रेंट क्रूड का भाव फिर से चढ़कर 99-100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक तनावों के कारण बाजार की धारणा प्रभावित रही, जिससे महंगाई और आयात खर्च में संभावित वृद्धि को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

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