भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री कमला पर्सद-बिसेसर के मध्य आयोजित द्विपक्षीय बैठक में आपसी रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने तथा आर्थिक सहभागिता को नई गति देने पर गहन विमर्श हुआ।
वार्ता के उपरांत त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर जारी एक वक्तव्य में कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, आर्थिक सहयोग को अधिक मजबूत करने और आधारभूत विकास योजनाओं के लिए एक्जिम बैंक से मिलने वाली फंडिंग को लेकर सार्थक संवाद किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के बीच दशकों पुराना मैत्रीपूर्ण संबंध लगातार मजबूत हो रहा है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री से हुई इस भेंट पर प्रसन्नता प्रकट करते हुए बताया कि वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्व यात्रा के दौरान की गई घोषणाओं और वादों पर अमल की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया गया।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जुलाई माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के त्रिनिदाद दौरे के समय कई जनकल्याणकारी घोषणाएं की गई थीं। इनमें वहां के प्रमुख शैक्षणिक अभियानों के लिए 2,000 लैपटॉप उपलब्ध कराने, वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय में हिंदी व भारतीय अध्ययन से जुड़ी अकादमिक पीठों को पुनर्जीवित करने और 800 जरूरतमंदों को कृत्रिम अंग वितरित करने का निर्णय शामिल था। इसके अलावा, त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (क्यूआईपी) के तहत नई दिल्ली द्वारा हर साल पांच परियोजनाओं हेतु 50,000 डॉलर की सहायता देने और वहां के विदेश मंत्रालय परिसर में ऊर्जा उत्पादन हेतु सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम लगाने पर भी सहमति बनी थी।
कैरेबियाई देश त्रिनिदाद में भारतीय समुदाय की विशेष उपस्थिति है, जहां लगभग 5.75 लाख भारतीय मूल के नागरिक रहते हैं, जो वहां की समग्र जनसंख्या का करीब 42 प्रतिशत हैं। प्रधानमंत्री मोदी का वह दौरा उस समय हुआ था जब त्रिनिदाद में वर्ष 1845 से शुरू हुए भारतीय प्रवासियों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ मनाई जा रही थी।
इससे पूर्व मई माह में विदेश मंत्री जयशंकर ने भी इस द्वीपीय राष्ट्र का दो दिवसीय दौरा किया था, जिस दौरान दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य, पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर और आयुर्वेद सहित विभिन्न क्षेत्रों में आठ महत्वपूर्ण करारों को अंतिम रूप दिया था। विदेश मंत्री के अनुसार, इन करारों में विदेश एवं सीएआरआईकॉम मामलों के मंत्रालय भवन में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना, संक्रामक रोग (वेक्टर) नियंत्रण, नेल्सन द्वीप के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय में आयुर्वेद पीठ स्थापित करने जैसे अहम प्रावधान शामिल रहे।