नए अंतरराष्ट्रीय टैक्स फ्रेमवर्क में ब्रिक्स की बात सुनना जरूरी: वित्त मंत्री

नए अंतरराष्ट्रीय टैक्स फ्रेमवर्क में ब्रिक्स की बात सुनना जरूरी: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के कर प्रमुखों के सम्मेलन में कहा कि सीमा पार कर प्रणाली को लेकर जारी वैश्विक बातचीत में ब्रिक्स राष्ट्रों के पक्ष को प्रमुखता से शामिल किया जाए। उन्होंने आगाह किया कि निकट भविष्य में होने वाले बहुपक्षीय समझौते आने वाले दशकों के लिए वैश्विक कर प्रणाली का भविष्य तय करेंगे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के जरिए सीमा पार कर नियमों की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों के दौरान इन मंचों पर तय की जाने वाली नीतियां आने वाली पूरी पीढ़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था की नींव बनेंगी, इसलिए इन नीतियों का समावेशी होना आवश्यक है।

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि ब्रिक्स देश स्रोत क्षेत्राधिकार वाली बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं, जिन्होंने एक छोटे आधार से शुरुआत कर सुदृढ़ आंतरिक कर क्षमता विकसित की है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय नियमों को न्यायसंगत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए ब्रिक्स देशों का दृष्टिकोण बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिक्स कर प्रशासनों का आपसी तालमेल किसी एक देश के कार्यकाल तक सीमित न रहकर भविष्य में भी स्थायी रूप से जारी रहेगा।

सदस्य राष्ट्रों की साझी समस्याओं के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय कराधान, ट्रांसफर प्राइसिंग और राजस्व आंकड़ों पर नए कार्यसमूहों के गठन की चर्चा करते हुए उन्होंने भारतीय कर प्रणाली में हुए डिजिटल बदलावों का ब्योरा दिया। इनमें फेसलेस मूल्यांकन, प्री-फिल्ड टैक्स रिटर्न, रियल-टाइम इनवॉइस प्रमाणीकरण और एआई की मदद से करदाता सहायता जैसी पहलें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक और डेटा के प्रयोग से कर प्रणाली को मानवीय हस्तक्षेप पर कम निर्भर और अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है, जिसे टैक्स सहयोग टूल और नॉलेज हब के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है।

सत्र के दौरान राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान और ट्रांसफर प्राइसिंग पर गठित होने वाला नया समूह संधियों के विश्लेषण और ऑडिट संबंधी अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए एक स्थायी मंच बनेगा। उन्होंने जोर दिया कि बहुपक्षीय कर वार्ताओं में विकासशील देशों की साझी आवाज की नितांत आवश्यकता है, जो अभी पर्याप्त नहीं दिखती। इन पहलों के जरिए भारत के नेतृत्व में ब्रिक्स समूह वैश्विक कर नियमों में विकासशील देशों के हितों को सशक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।

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