विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अफगानिस्तान के पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। भारत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की सैन्य आक्रामकता क्षेत्र की संप्रभुता और शांति व्यवस्था के पूरी तरह खिलाफ है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता के दौरान भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तान द्वारा की गई यह सैन्य कार्रवाई घोर निंदनीय है। उन्होंने इस हिंसा में जान गंवाने वाले आम नागरिकों के प्रति दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति भारत की संवेदनाएं व्यक्त कीं। साथ ही, उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि भारत इस संकट में अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े होने से पहले पाकिस्तान को अपने इस आक्रामक रवैये पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
यह हमला सोमवार, 21 सितंबर को हुआ था, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में एयरस्ट्राइक की। तालिबान प्रशासन के अनुसार, इन हमलों में तीन आम नागरिकों की मौत हो गई। हमलों के बाद तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस सैन्य कार्रवाई का उचित जवाब देने की खुली चेतावनी दी है।
मुजाहिद के मुताबिक, पाकिस्तानी बमबारी में कुनार के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जहां एक महिला और दो पुरुषों की मृत्यु हो गई, जबकि दो महिलाएं और दो पुरुष जख्मी हुए हैं। वहीं, पक्तिका प्रांत में एक स्थानीय दुकान और रिहायशी मकान पर हमला किया गया। तालिबान प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सैन्य तंत्र अपने देश में सुरक्षा मोर्चे पर मिली अंदरूनी नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए अफगानिस्तान की सीमा में इस तरह के हमले कर रहा है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने बयान में जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि यह कार्रवाई पहले किए गए अपराधों की ही एक कड़ी है और अफगान पक्ष इसका माकूल जवाब देगा। पिछले कुछ महीनों के दौरान दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव में लगातार इजाफा देखा गया है, जहां दोनों ओर से कई बार गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं और आम लोगों के हताहत होने पर चिंता बढ़ी है।
पाकिस्तान की ओर से अक्सर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि अफगान प्रशासन अपनी धरती से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे चरमपंथी गुटों की गतिविधियों को रोकने में असमर्थ रहा है, जिसे काबुल सिरे से नकारता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में, ‘संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान’ (यूनामा) ने 28 जुलाई को अपनी रिपोर्ट में रेखांकित किया था कि 1 अप्रैल से 30 जून के बीच सीमा पार सैन्य हिंसा में 57 नागरिकों की मौत हुई और 342 लोग घायल हुए। यूनामा के मुताबिक, नागरिक हताहतों के पीछे मुख्य वजह हवाई हमले और जमीनी संघर्ष थे, और इस अवधि में दर्ज सभी नागरिक मौतों व घायलों के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार माना गया था।