भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2.0’ का आयोजन राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक किया जाएगा। पाकिस्तान सीमा के निकट दो सप्ताह से अधिक चलने वाले इस साझा युद्धाभ्यास में अमेरिकी वायुसेना के पांचवीं पीढ़ी के आधुनिक लड़ाकू विमान एफ-35 पहली बार भारतीय धरती पर किसी सैन्य अभ्यास में भाग लेंगे। इससे पूर्व एफ-35 को भारत में केवल ‘एयरो इंडिया’ के दौरान देखा गया था।
भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख (वाइस चीफ) एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने स्पष्ट किया कि भारतीय बल पहले भी एफ-35 उड़ाने वाले देशों के साथ युद्धाभ्यास कर चुके हैं और ऐसे दो से तीन साझा अभ्यासों में शामिल रहे हैं, हालांकि भारत में इसका यह पहला अवसर है। उन्होंने बताया कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के संदर्भ में दो अहम पहलू हैं—पहला यह कि भारत स्वयं अपना पांचवीं पीढ़ी का विमान तैयार कर रहा है, जिसके लिए आवश्यक तकनीकी क्षमता, कौशल और सहायक तंत्र मौजूद हैं। दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इस क्षमता निर्माण के माध्यम से देश में जरूरी विशेषज्ञता विकसित हो रही है।
अभ्यास की रूपरेखा साझा करते हुए एयर मार्शल दीक्षित ने जानकारी दी कि तय सामरिक बनावट (कॉन्स्ट्रक्ट) के तहत कुल 65 देशों को आमंत्रित किया गया था। इस अभ्यास का उद्देश्य प्रतिभागी मित्र देशों की वायुसेनाओं के साथ एक निर्धारित स्तर की इंटर-ऑपरेबिलिटी (पारस्परिक परिचालन क्षमता) हासिल करना है। उन्होंने बताया कि मुख्य अभ्यास में विमानों के साथ 7 विदेशी राष्ट्र—अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश—शामिल हो रहे हैं, जबकि 32 अन्य देश पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में हिस्सा लेंगे। जिन देशों के साथ भारत अलग से अभ्यास करता है, वे इस विशिष्ट कॉन्स्ट्रक्ट का हिस्सा नहीं हैं।
जोधपुर में जुटने वाले विदेशी सैन्य बेड़े में अमेरिका के 6 एफ-35 और 2 केसी-135 टैंकर विमान शामिल हैं। फ्रांस 7 राफेल, 3 ए400एम और 2 एमआरटीटी विमानों के साथ भागीदारी कर रहा है, जबकि जर्मनी 2 ए400एम विमान भेज रहा है। इसके अतिरिक्त, यूएई के 6 एफ-16 और 1 ग्लोबल 6000, ऑस्ट्रेलिया व बांग्लादेश के 1-1 सी-130 तथा श्रीलंका का 1 किंग एयर 350 विमान इस अभ्यास में तैनात रहेगा। मेजबान भारतीय वायुसेना अपने राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, एलसीए (तेजस), जगुआर, मिराज और मिग-29 विमानों के साथ अभ्यास में उतरेगी।
भारतीय वायुसेना ने ‘तरंग शक्ति’ अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2024 में की थी, जिसका पहला संस्करण दो चरणों में पूरा हुआ था। पहला चरण तमिलनाडु के सुलूर में संपन्न हुआ, जिसमें फ्रांस के राफेल के साथ जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन के यूरोफाइटर टाइफून शामिल हुए थे, जबकि भारत ने राफेल, सुखोई, मिराज 2000, जगुआर, तेजस, मिग-29 और प्रचंड जैसे प्लेटफार्मों का प्रदर्शन किया था। वहीं, दूसरे चरण की मेजबानी जोधपुर ने की थी, जहां ऑस्ट्रेलिया के ईए-18जी ग्रोलर, ग्रीस व यूएई के एफ-16 और अमेरिका के ए-10 व एफ-16 सहित 27 लड़ाकू विमान, दो एयर-टू-एयर रीफ्यूलर, दो अवाक्स और तीन स्पेशल फोर्स एयरक्राफ्ट शामिल हुए थे।