विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की ओर से जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद और अनुचित करार दिया। भारत ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि संगठन को देश के अंदरूनी मामलों में अवांछित बयानबाजी करने का कोई हक नहीं है, साथ ही उसे पाकिस्तान को अपनी हरकतों पर रोक लगाने की सीख देनी चाहिए।
मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया कि तथाकथित ओआईसी कॉन्टैक्ट ग्रुप द्वारा जारी संयुक्त बयान में भारत के संबंध में जो बातें कही गई हैं, वे तथ्यात्मक रूप से भ्रामक और अवांछित हैं। भारत सरकार ने इस समूह द्वारा अपनाए गए रुख को पूरी तरह से अमान्य घोषित किया है।
ओआईसी की साख पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत के संप्रभु मामलों में दखल देने का इस समूह के पास न तो कोई कानूनी आधार है और न ही अधिकार। बयान में रेखांकित किया गया कि केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का संपूर्ण भूभाग भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। किसी खास राजनीतिक स्वार्थ के तहत गढ़े गए झूठे प्रचार को बार-बार दोहराने से यह ऐतिहासिक और वैधानिक वास्तविकता कतई नहीं बदल सकती। ऐसे पूर्वाग्रह से भरे आख्यानों को निरंतर समर्थन देने से स्वयं ओआईसी की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
पाकिस्तान की भूमिका पर प्रहार करते हुए भारत ने कहा कि ओआईसी को चाहिए कि वह अपने मंच का इस्तेमाल पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार के लिए न होने दे। इसके स्थान पर संगठन को इस्लामाबाद को आत्ममंथन करने और अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सक्रिय आतंकी ढांचे पर प्रभावी रोक लगाने की नसीहत देनी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि पाकिस्तान का सीमा पार आतंकवाद को प्रश्रय और पोषण देने का इतिहास पुराना रहा है।
यह कूटनीतिक गतिरोध बुधवार को उस समय उत्पन्न हुआ, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के इतर आयोजित ओआईसी कॉन्टैक्ट ग्रुप की बैठक में भारत के आंतरिक मामलों को लेकर अवांछित और निराधार टिप्पणियां की गई थीं।