संयुक्त राष्ट्र में नेतन्याहू ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई और गाजा नीति का किया बचाव, नरसंहार के आरोपों को नकारा

संयुक्त राष्ट्र में नेतन्याहू ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई और गाजा नीति का किया बचाव, नरसंहार के आरोपों को नकारा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर इजराइल और अमेरिका द्वारा की गई संयुक्त सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह जायज ठहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह कदम न उठाया जाता, तो न केवल इजराइली नागरिकों पर बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा पर गहरा संकट मंडरा सकता था। नेतन्याहू ने इस सैन्य अभियान को आत्मरक्षा के साथ-साथ मानव सभ्यता के अस्तित्व की रक्षा का प्रयास बताया।

संबोधन में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्हें इस लड़ाई में इजराइल का सबसे अहम और मजबूत सहयोगी करार दिया। ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के संदर्भ में उन्होंने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख किया। इस कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को बंद करने की चेतावनी सामने आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका गहरा गई है।

नेतन्याहू के मंच पर आते ही कई देशों के राजनयिकों ने विरोध जताते हुए हॉल से बहिर्गमन किया। इस पर टिप्पणी करते हुए इजराइली प्रधानमंत्री ने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को ‘कायर’ कहा, वहीं उनके समर्थकों ने ‘अम इजरायल चाई’ (इजराइल की कौम जिंदा है) के नारों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने इजराइल को एक ऐसा राष्ट्र बताया जो इस समय सात अलग-अलग मोर्चों—हमास, हिज्बुल्लाह, हूती विद्रोही, ईरान, इराक व सीरिया के सशस्त्र संगठन और वेस्ट बैंक के लड़ाकों—के खिलाफ एक साथ संघर्ष कर रहा है। अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा किए गए हमलों की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उनका देश डगमगाया नहीं, बल्कि उसने “शेरों की तरह” पलटवार किया।

गाजा में चलाए जा रहे सैन्य अभियान पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास द्वारा लगाए गए ‘नरसंहार’ के आरोपों को खारिज किया और इसे “इस सदी का सबसे बड़ा असत्य” करार दिया। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने तर्क दिया कि किसी नरसंहार करने वाली व्यवस्था के तहत गाजा के नागरिकों को 10 लाख पोलियो के टीके और 20 लाख टन खाद्य राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती। दूसरी ओर, रिपोर्टों में इजराइली कार्रवाई के दौरान गाजा में लगभग 70 हजार लोगों की मौत, भारी विस्थापन और गंभीर मानवीय संकट की स्थिति का भी उल्लेख है।

अपने भाषण के दौरान उन्होंने तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान पर तीखा हमला बोला और उन्हें ‘तानाशाह’ कहते हुए आरोप लगाया कि वे हमास के नेताओं को पनाह देते हैं। साथ ही उन्होंने कुछ पश्चिमी देशों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे यहूदी-विरोधी दबाव के आगे समर्पण कर रहे हैं। गौरतलब है कि ब्रिटेन सहित कुछ पश्चिमी देशों ने वेस्ट बैंक से आने वाले इजराइली उत्पादों पर सीमित पाबंदियां लगाई हैं। वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों पर हो रही हिंसा को नेतन्याहू ने गंभीर मुद्दा मानने से इनकार करते हुए इसके लिए कुछ उपद्रवी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया। नेतन्याहू का यह भाषण अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजराइल और उसके विरोधी पक्षों के मध्य मौजूद गहरे कूटनीतिक मतभेदों को उजागर करता है।

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