राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए तकनीकी संप्रभुता अनिवार्य: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए तकनीकी संप्रभुता अनिवार्य: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली स्थित पूसा के एनएएससी (NASC) परिसर में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के 85वें स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि देश की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और समग्र प्रगति से जुड़े अहम क्षेत्रों में विदेशी प्रौद्योगिकियों पर अनिश्चितकाल तक निर्भर नहीं रह सकता। इसके लिए उन्होंने अनुसंधान केंद्रों से ऐसे स्वदेशी विकल्प तैयार करने पर बल दिया जो वैश्विक मानकों पर गुणवत्ता, लागत और क्षमता के स्तर पर खरे उतरें।

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं को उन प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी चाहिए जहां देश आयात पर निर्भर है, ताकि समय रहते घरेलू समाधान पेश किए जा सकें। उनका कहना था कि देश का व्यापक उद्देश्य मात्र विदेशी आयात को घटाना नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर अग्रणी प्रौद्योगिकी प्रदाता के रूप में उभरना होना चाहिए। इस राष्ट्रीय आयोजन में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव व सीएसआईआर की महानिदेशक एन. कलाइसेल्वी, विभिन्न प्रयोगशालाओं के निदेशक, शोधकर्ता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, स्टार्टअप्स और 14 देशों के 40 से अधिक राजनयिक उपस्थित थे, जिन्होंने सीएसआईआर की तकनीकी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

वर्ष 1942 में अपनी शुरुआत करने वाली इस संस्था के ऐतिहासिक योगदान की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि सीएसआईआर स्वतंत्रता-पूर्व काल से लेकर अब तक राष्ट्र निर्माण में भागीदार रहा है। आठ दशकों से अधिक की इस यात्रा में परिषद ने अनेक तकनीकी क्षेत्रों में अपनी क्षमता सिद्ध की है। अब समय आ गया है कि संस्थान वर्तमान व भावी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर अपने अनुसंधानों को नया स्वरूप दे। उन्होंने चमड़ा उद्योग, स्वास्थ्य, रत्न-आभूषण, कृषि, सड़क निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में राज्यों की पहचान से जुड़े योगदानों की चर्चा की। साथ ही बताया कि विगत दस वर्षों में विज्ञान की पहुंच जनसामान्य तक अधिक प्रभावी रूप में सुनिश्चित हुई है, जिससे आम नागरिक प्रयोगशालाओं में होने वाले अनुसंधानों के प्रत्यक्ष लाभ से परिचित हो सके हैं।

जितेंद्र सिंह ने प्रयोगशालाओं में विकसित होने वाली तकनीकों को बाजार तक शीघ्रता से पहुंचाने के लिए उद्योग जगत के साथ आरंभिक चरण से ही साझेदारी की वकालत की। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से अनुसंधान पूरा होने के बाद साझेदार खोजने के स्थान पर उद्योगों को सह-निर्माता की भूमिका निभानी चाहिए। वैज्ञानिक अनुसंधान की तकनीकी बारीकियों से भलीभांति परिचित होते हैं, वहीं उद्योग पक्ष बाजार की मांग, बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत नियंत्रण को बेहतर समझता है। उन्होंने बड़ी कंपनियों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स से सीएसआईआर के साथ दीर्घकालिक अनुसंधान सहयोग स्थापित करने का आह्वान किया।

अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीकी संप्रभुता के बिना वास्तविक राष्ट्रीय संप्रभुता संभव नहीं है। परमाणु ऊर्जा, स्वच्छ ईंधन, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, इंडिया-एआई मिशन और इंडिया जीनोम मिशन जैसी पहलें अंतर-मंत्रालयी और समग्र सरकारी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। उन्होंने अतीत की उपलब्धियों तक सीमित रहने के बजाय प्राथमिकताओं को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता जताई और इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, घरेलू दवा निर्माण, सौर तकनीक व मशीनीकृत सीवर सफाई जैसी महत्वपूर्ण पहलों का उदाहरण दिया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री महोदय ने सीएसआईआर के नए प्रतीक ‘साइरा’ (CIRA: CSIR’s Innovation and Research Ambassador) का अनावरण किया। इसके साथ ही सीएसआईआर@85 विशेष डाक टिकट, इंडस्ट्री कनेक्ट वीडियो और टेक्नोलॉजी कंपेंडियम भी जारी किए गए। महानिदेशक एन. कलाइसेल्वी ने अपने संबोधन में 37 प्रयोगशालाओं और 10,000 से अधिक कर्मियों के विशाल तंत्र की उपलब्धियों को साझा किया। अंत में, विकसित भारत@2047 के संकल्प को दोहराते हुए जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिकों, अभियंताओं और कर्मियों के योगदान की सराहना की और परिषद से वर्ष 2047 के बाद की दीर्घकालिक वैज्ञानिक आवश्यकताओं के अनुरूप नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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