सेंसेक्स 315 अंक और निफ्टी 77 अंक चढ़कर बंद, पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार

सेंसेक्स 315 अंक और निफ्टी 77 अंक चढ़कर बंद, पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार

पिछले कारोबारी सत्र की तेज गिरावट से उबरते हुए घरेलू शेयर बाजार ने हफ्ते के अंतिम दिन शुक्रवार को वापसी की, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त दर्ज करते हुए हरे निशान में बंद हुए। इस दौरान दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में 0.43 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया।

वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी सैन्य हमलों के बीच अमेरिका और ईरान के मध्य संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने बाजार को राहत पहुंचाई। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे प्रमुख सूचकांक दिन के उच्चतम स्तरों के करीब बंद होने में सफल रहे। शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की मजबूती रही और यह 23,140.50 के स्तर पर पहुंच गया।

दिन के शुरुआती सत्र में दोनों सूचकांक सीमित दबाव में खुले थे। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,580.54 की तुलना में 54.61 अंक गिरकर 73,525.92 पर खुला, लेकिन बाद में इसने 387.51 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,968.05 का उच्चतम स्तर छुआ। इसी तरह निफ्टी भी अपने पिछले बंद 73,968.05 के मुकाबले 28 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की नरमी लेकर 23,035 पर खुला और दिन के कारोबार में 99.60 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 23,162.70 के शीर्ष स्तर तक पहुंचा।

व्यापक बाजार में इस दौरान मिला-जुला रुझान देखने को मिला। मझोली कंपनियों वाले निफ्टी मिडकैप 100 में 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि छोटी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.15 प्रतिशत की बढ़त रही। क्षेत्रीय सूचकांकों पर नजर डालें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो में सर्वाधिक तेजी दर्ज हुई, जबकि निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मीडिया, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली का दबाव देखा गया।

निफ्टी 50 के शेयरों में एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो बढ़त दर्ज करने वाले शीर्ष शेयरों में शामिल रहे। दूसरी तरफ मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, इंफोसिस, ओएनजीसी और ट्रेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई।

बाजार में हालिया गिरावट के बाद चुनिंदा शेयरों में हुई खरीदारी ने सकारात्मक माहौल तो बनाया, लेकिन तेजी का दायरा सीमित रहा। कच्चे तेल की दरों में उतार-चढ़ाव और बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर बने रहने के कारण बाजार की रिकवरी पर असर पड़ा। इसके अलावा महंगाई, विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर बने दबाव की वजह से निवेशकों ने सतर्कता बनाए रखी।

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