केंद्रीय राजनाथ सिंह ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में ‘एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026’ के मंच से कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से जटिल होती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच भारत को घरेलू स्तर पर रक्षा उत्पादन क्षमताएं बढ़ाने और महत्वपूर्ण तकनीकों में पूर्ण स्वावलंबन हासिल करने की आवश्यकता है।
रक्षा मंत्री ने देश के विनिर्माण दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा कि सरकार का सिद्धांत स्पष्ट है कि जिन उत्पादों का निर्माण भारत में संभव है, उनका उत्पादन घरेलू स्तर पर ही किया जाए। उन्होंने कहा कि छोटे स्क्रू और चिप से लेकर बड़े जहाजों और पूर्ण हथियार प्रणालियों तक का देश में ही निर्माण करना रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने का एकमात्र मार्ग है।
उन्होंने स्वदेशी डिजाइन, तकनीकी नवाचार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपकरणों के विकास को दीर्घकालिक रक्षा तैयारियों के लिए अपरिहार्य बताया। राजनाथ सिंह के अनुसार, संपूर्ण रक्षा आपूर्ति श्रृंखला पर देश की मजबूत पकड़ विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए बेहद आवश्यक है।
घरेलू रक्षा उद्योग के विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधारों से पिछले कुछ वर्षों में विनिर्माण क्षेत्र को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की वर्तमान योजनाएं केवल तात्कालिक जरूरतों की पूर्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य के रक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखकर आत्मनिर्भरता का ढांचा तैयार किया जा रहा है।
युद्ध के बदलते स्वरूप की तुलना टेलीकॉम क्षेत्र में 2जी से 5जी के विकास से करते हुए उन्होंने कहा कि सैन्य संघर्ष अब पांचवीं पीढ़ी के दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, स्वायत्त तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्र युद्ध के परिणामों पर गहरा प्रभाव डालेंगे। उन्होंने कहा कि भारत इन उभरती तकनीकों और उनके नियामक तंत्र को घरेलू स्तर पर विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र कई आयामों में विस्तृत होंगे, जिसके लिए भारत संपर्क व गैर-संपर्क और काइनेटिक व गैर-काइनेटिक सैन्य अभियानों के साथ रणनीतिक ऊर्जा संसाधनों के विविधीकरण पर भी काम कर रहा है। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों और तकनीक विशेषज्ञों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि देश का युवा वर्ग एआई और ड्रोन जैसी तकनीकों पर कार्य कर रहा है, जिससे वे केवल रोजगार की तैयारी तक सीमित न रहकर देश के भावी युद्धों के लिए तकनीकी ढाल तैयार कर रहे हैं।