पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट, कच्चे तेल में उबाल, वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में मजबूती और विदेशी निवेशकों की पूंजी वापसी के कारण सोमवार को भारतीय इक्विटी बाजार भारी गिरावट के साथ समाप्त हुए।
कारोबारी सत्र के समापन पर बीएसई सेंसेक्स 1.52 प्रतिशत यानी 1,124.02 अंकों की तीव्र गिरावट के बाद 72,771.72 पर सिमट गया। इसी प्रकार, एनएसई निफ्टी 1.56 प्रतिशत अर्थात 360.25 अंकों के नुकसान के साथ 22,780.25 के स्तर पर बंद हुआ। आज की इस गिरावट में बड़ी, मझोली और छोटी पूंजी वाली कंपनियों के शेयरों पर समान रूप से बिकवाली का असर देखा गया।
सूचकांक की प्रमुख कंपनियों में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावर ग्रिड और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। व्यापक स्तर पर बाजार की स्थिति काफी निराशाजनक रही, जहां निफ्टी मिडकैप 100 में 1.63 प्रतिशत तथा निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.85 प्रतिशत तक का गोता देखा गया।
बाजार में नकारात्मक रुख का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में जारी तनाव रहा। कारोबारी वर्ग इस बात को लेकर सशंकित है कि लंबे खिंचते संघर्ष से तेल आपूर्ति चक्र प्रभावित हो सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा। इस अनिश्चितता के कारण तेल कीमतों में तेजी आई, जहां ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत चढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल पर भारत की भारी आयात निर्भरता के कारण ऊर्जा की ये ऊंची कीमतें घरेलू मोर्चे पर महंगाई का बड़ा खतरा मानी जा रही हैं।
वैश्विक स्तर पर बॉन्ड प्रतिफल में हुई बढ़ोतरी ने भी बाजार पर दोहरी मार की। मुद्रास्फीति की नई चिंताओं के कारण बॉन्डों में बिकवाली चली, जिससे अमेरिका के दो-वर्षीय ट्रेजरी नोट्स की यील्ड पांच आधार अंक सुधरकर 4.90 प्रतिशत और दस-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड चार आधार अंक बढ़कर 5.20 प्रतिशत पर पहुंच गई। पश्चिमी देशों में ट्रेजरी प्रतिफल में वृद्धि होने से विकासशील देशों के शेयर बाजारों, विशेषकर भारत जैसे उभरते बाजारों से जोखिम पूंजी बाहर जाने लगती है।
दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली के दबाव को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की सतत निकासी ने और तेज कर दिया। जुलाई व अगस्त माह के दौरान खरीदारी करने वाले विदेशी निवेशक सितंबर में निकासी का रुख अपना चुके हैं। एनएसई व एनएसडीएल के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में अब तक 17,131 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है। इस निकासी के साथ चालू वर्ष में विदेशी निवेशकों द्वारा की गई कुल शुद्ध बिक्री 2.41 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है।