रूसी संसद के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में होंगे शामिल

रूसी संसद के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में होंगे शामिल

भारत यात्रा पर आए रूसी संसद (स्टेट ड्यूमा) के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने रविवार, 25 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। वोलोदिन 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में हिस्सा लेने के उद्देश्य से भारत पहुंचे हैं।

भारत में स्थित रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से इस संदर्भ में जानकारी साझा की। दूतावास के अनुसार, रूसी संसद के अध्यक्ष 25 अक्टूबर को राजघाट स्मारक परिसर पहुंचे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता महात्मा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वोलोदिन इस समय अपनी आधिकारिक यात्रा के तहत भारत में मौजूद हैं।

रूसी संसदीय प्रमुख का यह दौरा मुख्य रूप से 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के ‘संविधान सदन’ स्थित सेंट्रल हॉल में आयोजित होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के लिए है। भारत की मेजबानी में हो रहे इस दो दिवसीय आयोजन में ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों सहित सहयोगी राष्ट्रों के विधायी प्रमुख शिरकत करेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से जन-केंद्रित विकास को गति देने और अंतर-संसदीय संवाद को सुदृढ़ बनाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बीते गुरुवार को संसद भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रूपरेखा साझा की थी। उन्होंने कहा था कि यह मंच भारत की संसदीय कूटनीति के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम में सदस्य और साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों व नेताओं के अलावा केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष, सांसद और अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस फोरम में शामिल होकर विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों के साथ औपचारिक संवाद करेंगे।

लोकसभा अध्यक्ष के अनुसार, इस पूरे आयोजन के दौरान कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों का भी समन्वय किया जाएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि अब तक 18 देशों की ओर से मिले सुझावों के आधार पर विचार-विमर्श का खाका तैयार किया गया है। साथ ही, भारत ने एक नई पहल करते हुए 64 राष्ट्रों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है, जो अपने आप में इस स्तर का पहला प्रयास है।

गौरतलब है कि इससे पूर्व तीन अक्टूबर को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की अध्यक्षता में भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों पर परामर्श समिति की एक अहम बैठक हुई थी। उस बैठक में यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीतिक संवाद और वार्ता के पक्ष में भारत के रुख को दोहराया गया था। साथ ही, दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-जन के आपसी रिश्तों की समग्र प्रगति की समीक्षा की गई थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *