जर्मन मीडिया हाउस डायचे वेले के एक पत्रकार की खोज के दौरान तालिबानियों ने उसके एक रिश्तेदार को गोली मार दी। डायचे वेले ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा है कि तालिबानी पत्रकार की तलाश में घर-घर जा रहे थे। इस दौरान उसके दो रिश्तेदारों को गोली मारी गई। इनमें से एक की मौत हो गई। एक बच निकलने में कामयाब रहा।
संयुक्त राष्ट्र को भेजी गई एक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही तालिबान विरोधियों के साथ नर्म व्यवहार और उन्हें बख्शने की बात कह रहा हो, लेकिन असलियत ये है कि हर उस आदमी की तलाश में घर-घर तालिबानी लड़ाके छापे मार रहे हैं, जिन पर उन्हें अमेरिका की मदद करने का शक है।
न्यूज एजेंसी AFP ने नॉर्वे के ग्लोबल एनालिसिस सेंटर की एक रिपोर्ट के हवाले से ये जानकारी दी है। ये रिपोर्ट UN को दी गई है। इसमें कहा गया है कि तालिबानियों का तलाशी अभियान “टारगेटेड’ है। उन लोगों की तलाश की जा रही है, जिन्होंने नाटो सेनाओं या अमेरिकी के लिए काम किया या मदद की। जिन लोगों ने समर्पण नहीं किया उनके परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है।
इन परिवारों को शरिया कानूनों के तहत सजा दी जा रही है। नॉर्वे ग्लोबल एनालिसिस सेंटर के चेयरमैन क्रश्चियन नेलेमन ने कहा कि नाटो और US की मदद करने वाले, उनके सहयोगी और उनके परिवार, सभी को जान का खतरा है।
तालिबान ने इन सभी आरोपों से इंकार किया है, जो कि वो अफगानिस्तान पर कब्जे के साथ ही करता रहा है। तालिबान का कहना है कि लड़ाकों को निजी इमारतों में घुसने से मना कर दिया गया है। महिलाओं और पत्रकारों को डरने की जरूरत नहीं है। नए शासन में डर जैसी कोई बात नहीं है।
कई मीडिया वर्कर्स ने आपबीती सोशल मीडिया और अन्य जरियों से दुनिया के सामने रखने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कोई चीज रिकॉर्ड करने की कोशिश की तो तालिबानियों ने उन्हें पीटा। एक दिन पहले ही सरकारी टेलीविजन की एंकर शबनम दारवान ने कहा कि मुझे तालिबानियों ने दफ्तर में जाने से रोक दिया। कहा कि यहां महिलाओं के काम करने पर मनाही है और आप घर जाइए।