रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अगले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में RBI पायलट के तौर पर डिजिटल करेंसी लॉन्च कर सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बैंकिंग और आर्थिक सम्मेलन में RBI के एक सीनियर ऑफिसर ने इसकी जानकारी दी।
भुगतान और निपटान विभाग के चीफ जनरल मैनेजर पी. वासुदेवन ने कहा कि ‘मुझे लगता है कि कम से कम अगले साल की पहली तिमाही तक एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया जा सकता है। सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) देश की फिएट मुद्रा (जैसे रुपए, डॉलर या यूरो) का एक डिजिटल संस्करण है।इससे पहले RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि दिसंबर तक सीबीडीसी के सॉफ्ट लॉन्च की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन RBI ने इसको लेकर कोई आधिकारिक समयसीमा नहीं बताई है। वासुदेवन ने कहा कि, ‘हम काम कर रहे हैं और हम CBDC से संबंधित विभिन्न मुद्दों और बारीकियों पर गौर कर रहे हैं। वासुदेवन ने कहा कि RBI विभिन्न मुद्दों की जांच की जा रही है कि CBDC को किस वर्ग के लिए लॉन्च करना चाहिए।
यह कैश का इलेक्ट्रॉनिक रूप है। जैसे आप कैश का लेन-देन करते हैं, वैसे ही आप डिजिटल करेंसी का लेन-देन भी कर सकेंगे। CBDC कुछ हद तक क्रिप्टोकरेंसी (बिटकॉइन या ईथर जैसी) जैसे काम करती है। इससे ट्रांजैक्शन बिना किसी मध्यस्थ या बैंक के हो जाता है। रिजर्व बैंक से डिजिटल करेंसी आपको मिलेगी और आप जिसे पेमेंट या ट्रांसफर करेंगे, उसके पास पहुंच जाएगी। न तो किसी वॉलेट में जाएगी और न ही बैंक अकाउंट में। बिल्कुल कैश की तरह काम करेगी, पर होगी डिजिटल।
यह डिजिटल रुपया, डिजिटल पेमेंट से कैसे अलग है?
- बहुत अलग है। आपको लग रहा होगा कि डिजिटल ट्रांजैक्शन तो बैंक ट्रांसफर, डिजिटल वॉलेट्स या कार्ड पेमेंट्स से हो ही रहे हैं, तब डिजिटल करेंसी अलग कैसे हो गई?
- यह समझना बेहद जरूरी है कि ज्यादातर डिजिटल पेमेंट्स चेक की तरह काम करते हैं। आप बैंक को निर्देश देते हैं। वह आपके अकाउंट में जमा राशि से ‘वास्तविक’ रुपए का पेमेंट या ट्रांजैक्शन करता है। हर डिजिटल ट्रांजैक्शन में कई संस्थाएं, लोग शामिल होते हैं, जो इस प्रोसेस को पूरा करते हैं।
- उदाहरण के लिए अगर आपने क्रेडिट कार्ड से कोई पेमेंट किया तो क्या तत्काल सामने वाले को मिल गया? नहीं। डिजिटल पेमेंट सामने वाले के अकाउंट में पहुंचने के लिए एक मिनट से 48 घंटे तक ले लेता है। यानी पेमेंट तत्काल नहीं होता, उसकी एक प्रक्रिया है।
- जब आप डिजिटल करेंसी या डिजिटल रुपया की बात करते हैं तो आपने भुगतान किया और सामने वाले को मिल गया। यह ही इसकी खूबी है। अभी हो रहे डिजिटल ट्रांजैक्शन किसी बैंक के खाते में जमा रुपए का ट्रांसफर है। पर CBDC तो करेंसी नोट्स की जगह लेने वाले हैं।
डिजिटल करेंसी से चार बड़े फायदे हैं-
- एफिशियंसीः यह कम खर्चीली है। ट्रांजैक्शन भी तेजी से हो सकते हैं। इसके मुकाबले करेंसी नोट्स का प्रिटिंग खर्च, लेन-देन की लागत भी अधिक है।
- फाइनेंशियल इनक्लूजनः डिजिटल करेंसी के लिए किसी व्यक्ति को बैंक खाते की जरूरत नहीं है। यह ऑफलाइन भी हो सकता है।
- भ्रष्टाचार पर रोकः डिजिटल करेंसी पर सरकार की नजर रहेगी। डिजिटल रुपए की ट्रैकिंग हो सकेगी, जो कैश के साथ संभव नहीं है।
- मॉनेटरी पॉलिसीः रिजर्व बैंक के हाथ में होगा कि डिजिटल रुपया कितना और कब जारी करना है। मार्केट में रुपए की अधिकता या कमी को मैनेज किया जा सकेगा।