पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया की सेफ्टी के नाम पर आलोचनाओं का शिकार होने वाली फेसबुक ने अपना नाम बदल कर मेटा कर दिया, लेकिन उसके पुराने पैंतरे अब भी कायम हैं। फेयरप्ले, ग्लोबल एक्शन प्लान और रीसेट ऑस्ट्रेलिया की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि फेसबुक अब भी अपने विवादास्पद ऐल्गोरिद्म का इस्तेमाल कर बच्चों की ट्रैकिंग कर रहा है। इससे वह डेटा तैयार कर रहा है और बच्चों से संबंधित विज्ञाापनों को दिखा कर वह मोटा मुनाफा भी कमा रहा है।
जबकि मेटा की लॉन्च के समय फेसबुक ने वादा किया था वो अपने ऐल्गोरिद्म में बदलाव करेगा, ताकि उसके प्लेटफॉर्म से बच्चों विशेषकर टीनएजर का गलत इस्तेमाल नहीं हो। नई रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब भी बच्चों की ट्रैकिंग कर रहा है।
इस रिपोर्ट के आधार पर बच्चों के हितों में काम करने वाली संस्थाओं ने फेसबुक को ओपन लैटर लिखकर इस पर रोक लगाने की मांग की है। इसके जवाब में फेसबुक ने कहा कि वो बच्चों के डेटा की ट्रैकिंग नहीं कर रहा है। फेसबुक ने कहा वो 18 साल से कम उम्र के बच्चों का अकाउंट पर सर्विलांस नहीं कर रहा है। जबकि उसने बदलाव के तरीकों के बारे में नहीं बताया।रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक 18 साल से कम उम्र के बच्चों के ऑनलाइन बिहेवियर को ट्रेक करने के लिए एआई और सर्विलांस सिस्टम अब भी काम कर रहा है। व्हिसलब्लोअर फ्रांसिस होगेन ने भी अमेरिकी संसद में अपनी गवाही में आरोप लगाया था कि फेसबुक मुनाफा कमाने के लिए बच्चों का इस्तेमाल कर रहा है। फेसबुक 18 साल से कम बच्चों को अपने एप के लिए भविष्य का उपभोक्ता मानता है। इन आरोपों के चलते फेसबुक को बच्चों के इंस्टाग्राम ऐप की लॉन्चिंग को टालना पड़ा था।