232 दिन बाद अचानक प्रकट हुए परमबीर:क्राइम ब्रांच ऑफिस में परमबीर से 7 घंटे तक हुई पूछताछ

232 दिनों से गायब चल रहे मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और वर्तमान डीजी होम गार्ड परमबीर सिंह अचानक गुरुवार को मुंबई में प्रकट हो गए। वे सबसे पहले क्राइम ब्रांच ऑफिस पहुंचे और उनसे तकरीबन 7 घंटे की कड़ी पूछताछ हुई है। जानकारी के मुताबिक, DCP नीलोत्पल और उनकी टीम ने गोरेगांव में दर्ज वसूली के एक मामले में उनसे पूछताछ की है। इस मामले में सिंह के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हुआ था और कुछ दिन पहले उन्हें भगोड़ा भी घोषित किया गया था।

परामबीर सिंह के वकील राजेन्द्र मोकाशी ने कहा,”सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हम जांच में पूरा सहयोग कर रहे है। आज पुलिस के सामने पेश हुए है। सारे सवालों का जवाब दिया गया है। आगे भी जहां जरूरत होगी हम जांच में पूरा सहयोग करेंगे। अन्य केसों में भी पूरा सहयोग किया जाएगा। “

इससे पहले बुधवार को अचानक उनका फोन चंडीगढ़ में ऑन हुआ था। इसके बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि परमबीर जल्द ही मुंबई पुलिस के सामने पेश हो सकते हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह को बड़ी राहत देते हुए जांच में सहयोग करने की शर्त पर उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

उस दौरान कोर्ट में उनके वकील ने कहा था कि परमबीर सिंह को पूरे मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने जिन अधिकारियों को भ्रष्ट आचरण के लिए दंडित किया है, उन्हीं को आज शिकायतकर्ता बनाया गया है। अदालत में उनके वकील ने यह भी कहा था कि मुंबई में परमबीर की जान को खतरा है, इसलिए वे शहर से बाहर हैं। अब तक उनके खिलाफ 5 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

इससे पहले गृह विभाग ने परमबीर के गायब रहने की जानकारी इंटेलिजेंस ब्यूरो को भी दे दी थी। गौरतलब है कि परमबीर मई के महीने से स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी पर जाने के बाद से ही लापता थे। गृह विभाग ने सिंह को उनके चंडीगढ़ स्थित आवास पर कई पत्र भेजे और उनके ठिकाने के बारे में पूछताछ भी की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

पिछले महीने, गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा था कि वे IPS अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के प्रावधानों को देख रहे हैं।

मुंबई की ठाणे पुलिस ने जुलाई में परमबीर सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। वह पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ उनके द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए प्रदेश सरकार द्वारा गठित चांदीवाल आयोग के सामने पेश होने में बार-बार विफल रहे हैं। इसके बाद पहले उनके खिलाफ 5, फिर 25 और फिर 50 हजार का जुर्माना लगाया था। जस्टिस चांदीवाल आयोग ने परमबीर को चेतावनी है कि अगर वे जल्द पेश नहीं हुए तो उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जाएगा।सरकार के गृह विभाग ने परमबीर सिंह के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए 7 सदस्यीय SIT टीम गठित की थी। इस टीम की अध्यक्षता DCP स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। विमल अग्रवाल नाम के व्यापारी के खिलाफ जुहू पुलिस स्टेशन में दर्ज मकोका के केस की जांच भी SIT की टीम करेगी। परमबीर के कमिश्नर रहने के दौरान विमल अग्रवाल पर छोटा शकील से संबंध होने का आरोप लगाते हुए मकोका का केस दर्ज हुआ था।

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