सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि देश के सभी संरक्षित उद्यानों, नेशनल पार्कों और अभ्यारणों से लगे 1 किमी के दायरे में कोई भी फैक्ट्री नहीं होगी। इसके अलावा इनके आस-पास किसी भी तरह का खुदाई नहीं की जाएगी।
कोर्ट ने आगे कहा कि यह पूरा दायरा इको सेंसिटिव जोन (ESZ) होगा। ESZ सीमा के अंदर जो कुछ भी होगा, वह केवल मुख्य वन संरक्षक की परमिशन से होगा। यदि ESZ एक किमी बफर जोन से आगे जाता है या कोई लीगल इंस्ट्रूमेंट उच्च सीमा निर्धारित करता है तो विस्तार की जाने वाली सीमाएं मान्य होंगी।
ये फैसला जस्टिस, एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच का है। टीएन गोदावरमन मामले में संरक्षित वनों और नेशनल पार्कों को लेकर अर्जियों पर फैसला सुनाया है। देश में कुल 103 नेशनल पार्क और 544 वन्यजीव अभयारण्य हैं। मध्य प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप में सबसे अधिक नेशनल पार्क हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हर राज्य के मुख्य वन संरक्षक को उनके राज्य में ESZ के तहत मौजूद संरचनाओं की लिस्ट सौंपने को कहा है। वन विभागों को यह लिस्ट 3 महीने के अंदर बनाकर देनी होगी। कोर्ट ने कहा कि इको सेंसिटिव जोन में किसी भी तरह की माइनिंग की परमिशन नहीं होगी।सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2022 में हरियाणा में वन और गैर-वन भूमि के मुद्दों से जुड़े एक मामले की सुनवाई की थी। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि नागरिक अधिकारों से ज्यादा महत्वपूर्ण पर्यावरण है। कोर्ट ने आगे कहा था कि पर्यावरण को अन्य अधिकारों पर ज्यादा प्रभावी होना चाहिए और जंगलों को संरक्षित किया जाना चाहिए। एससी ने वनों को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।