आपराधिक केस और विभागीय जांच नहीं चल सकते एक साथ:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से RPF हेडकांस्टेबल को राहत

आपराधिक केस और विभागीय जांच नहीं चल सकते एक साथ:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से RPF हेडकांस्टेबल को राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर में पदस्थ RPF के हेडकांस्टेबल के खिलाफ विभागीय जांच पर रोक लगा दी है। साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन के महाप्रबंधक, सहायक सुरक्षा आयुक्त और जांच अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस केस में RPF के इंस्पेक्टर ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए हेडकांस्टेबल के खिलाफ विभागीय जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

रायपुर के रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट में पदस्थ हेडकांस्टेबल एके पात्रे और मोहित कुमार ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर के माध्यम से याचिका दायर की है। इसमें बताया गया कि याचिकाकर्ताओं पर रेलवे साइडिंग से आयरन प्लेट्स को कबाड़ बनाकर अन्य लोगों के साथ मिलकर बेच दिया गया।

मांढर निवासी अब्दुल खान से मारपीट कर उसे चोरी के आरोप में पकड़कर पिटाई की गई और तिल्दा चौकी में बंद कर दिया गया। RPF के चंगुल से छूटते ही दूसरे दिन अब्दुल खान ने ट्रेन के नीचे आकर सुसाइड कर लिया। इस केस में दोनों याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक केस के साथ ही विभागीय जांच के आदेश दिए गए।याचिका में बताया गया कि प्रकरण में आपराधिक केस दर्ज करने के साथ ही विभागीय जांच की गई और आरोप पत्र भी जारी कर दिया गया। याचिका में इसे चुनौती देते हुए कहा कि आपराधिक केस और विभागीय जांच एक साथ नहीं चल सकती। हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को याचिका को निराकृत करते हुए आदेश दिया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद भी 28 अप्रैल को रेलवे सुरक्षा बल के निरीक्षक व जांच अधिकारी ने विभागीय जांच पूर्ण करते हुए प्रतिवेदन सौंप दिया और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा कर दी।इस विभागीय जांच के खिलाफ याचिकाकर्ता हेडकांस्टेबल ने दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें हाईकोर्ट के पूर्व के आदेश का हवाला दिया गया है। साथ ही बताया है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी निरीक्षक ने दोनों जांच में समान गवाहों का बयान लेकर प्रतिवेदन पेश किया है, जो अनुचित है और कोर्ट के आदेश की अवमानना की श्रेणी में आता है। प्रकरण की सुनवाई के बाद जस्टिस आरसीएस सामंत ने विभागीय जांच पर रोक लगा दी है। साथ ही सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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