नक्सलवाद से मुक्त हुआ मध्य प्रदेश, 11 दिसंबर को ‘लाल सलाम’ को किया ‘आखिरी सलाम’: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

नक्सलवाद से मुक्त हुआ मध्य प्रदेश, 11 दिसंबर को ‘लाल सलाम’ को किया ‘आखिरी सलाम’: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल/बालाघाट: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को घोषणा की कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चलाए गए दृढ़ संकल्पित अभियान के कारण मध्य प्रदेश अब नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के अदम्य साहस और बलिदान के दम पर 11 दिसंबर को बालाघाट से ‘लाल सलाम’ को ‘आखिरी सलाम’ कर दिया गया है, जिसे प्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में लिखा जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भोपाल से वर्चुअल उपस्थिति में गुरुवार को बालाघाट में मौजूद आखिरी दो नक्सलियों, दीपक उइके और रोहित ने आत्मसमर्पण कर दिया।

ऐतिहासिक आत्मसमर्पण

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और गृह मंत्री श्री शाह के कुशल मार्गदर्शन में आज़ादी के बाद पहली बार नक्सलवाद के ख़िलाफ़ समेकित अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने 26 जनवरी 2026 तक नक्सलवाद की समाप्ति की अंतिम समय-सीमा घोषित की है, जिसके तहत नक्सलियों के पास नवजीवन या जीवन की समाप्ति में से एक को चुनने का विकल्प बचा था।

डॉ. यादव ने जानकारी दी कि पिछले 42 दिनों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ (MMC) ज़ोन में ऐतिहासिक रूप से कुल ₹7 करोड़ 75 लाख के इनामी 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

वर्ष 2025 में बड़ी उपलब्धि

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 नक्सली आत्मसमर्पण के मामले में ऐतिहासिक रहा, जब 10 नक्सलियों को मार गिराया गया और विगत 21 वर्षों में सर्वाधिक 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। प्रदेश में सक्रिय सभी नक्सली कैडरों को ध्वस्त कर दिया गया है।

विकास का मार्ग प्रशस्त

नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही मंडला, डिंडोरी और बालाघाट जैसे क्षेत्रों के विकास की बाधाएं समाप्त हो गई हैं। मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया कि वे माओवाद को पनपने नहीं देंगे और केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में विकास के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे।

शहीदों को नमन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अभियान में अपनी कुर्बानी देने वाले 38 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को नमन किया और उनकी शहादत को याद किया। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को ‘सरेंडर पॉलिसी’ के तहत पुनर्वासित कर नवजीवन दिया जाएगा, और सरकार उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रतिबद्ध है।

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