देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की बाज़ार में एकतरफा दबदबा (मोनोपॉली) अब जांच के घेरे में आ गया है। निष्पक्ष कारोबार सुनिश्चित करने वाली संस्था कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) इस बात की छानबीन कर रही है कि क्या इंडिगो ने अपनी मोनोपॉली बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन किया है।
CCI को संदेह है कि इंडिगो ने कॉम्पिटिशन एक्ट की धारा 4 का खुला उल्लंघन किया है, जिसके तहत कोई भी कंपनी अपनी धाक के बल पर मनमानी कीमत वसूल कर या सेवाओं को मनमाने ढंग से संचालित कर ग्राहकों का शोषण नहीं कर सकती। CCI विशेष रूटों पर दबदबे और किराया बढ़ाने के मामले जैसे पहलुओं की अंदरूनी छानबीन कर रही है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो आयोग औपचारिक जांच का आदेश देगा।
इंडिगो का संकट और मुआवजा: दिसंबर के पहले सप्ताह में एविएशन नियमों में बदलाव के कारण क्रू मेंबर्स की भारी कमी होने से इंडिगो की 1 से 10 दिसंबर के बीच 5000 से अधिक उड़ानें रद्द हुई थीं। इंडिगो की प्रवक्ता ने बताया कि एयरलाइन 3, 4 और 5 दिसंबर की प्रभावित उड़ानों के यात्रियों की सूची बना रही है और जनवरी में सीधे उनसे संपर्क करके मुआवजा देगी।
अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट से जांच: इंडिगो ने इस संकट की आंतरिक जांच का जिम्मा अंतर्राष्ट्रीय एविएशन एक्सपर्ट कैप्टन जॉन इल्सन को सौंपा है। सीईओ पीटर एल्बर्स ने शुक्रवार को DGCA समिति के सामने पेश होकर यह संकेत दिया कि एयरलाइन ऑपरेशनल मॉडल की गहराई से समीक्षा करने के दबाव में है।
DGCA का बड़ा एक्शन और नए नियम: फ्लाइट में देरी और ऑपरेशनल बाधाओं की बढ़ती घटनाओं के बीच, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयरलाइन की सुरक्षा और ऑपरेशनल अनुपालन की निगरानी कर रहे 4 फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर – ऋषि राज चटर्जी, सीमा झामनानी, अनिल कुमार पोखरियाल और प्रियम कौशिक को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।
DGCA ने निगरानी व्यवस्था को भी पूरी तरह बदल दिया है। शुक्रवार से लागू हुए नए 12-पेज के आदेश के अनुसार:
- निरीक्षण टीमें एयरपोर्ट पर अनिवार्य रूप से 7 घंटे तक रुककर वास्तविक समय में आकलन करेंगी।
- 32 बिंदुओं वाली स्पेशल एयरपोर्ट इंस्पेक्शन चेकलिस्ट अनिवार्य की गई है।
- निर्धारित उड़ान में तकनीकी कारण से 15 मिनट या उससे अधिक की देरी होने पर कंपनी को अनिवार्य रूप से जांच रिपोर्ट देनी होगी।
- किसी भी ‘मेजर डिफेक्ट’ की सूचना तुरंत फोन पर DGCA को देनी होगी, और 72 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी।