भारत सरकार ने ‘इलेक्ट्रिसिटी रूल्स 2026’ को किया अधिसूचित; उद्योगों के लिए कैप्टिव पावर के नियम हुए आसान

भारत सरकार ने ‘इलेक्ट्रिसिटी रूल्स 2026’ को किया अधिसूचित; उद्योगों के लिए कैप्टिव पावर के नियम हुए आसान

केंद्र सरकार ने देश के औद्योगिक ढांचे को मजबूती देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। इन नए नियमों के माध्यम से इलेक्ट्रिसिटी रूल्स, 2005 के ‘नियम 3’ में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा लाभ अपनी बिजली स्वयं पैदा करने वाले (कैप्टिव) उद्योगों को मिलेगा।

मुख्य बदलाव और लाभ: सरकार ने कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट के स्वामित्व की परिभाषा को विस्तार दिया है। अब इसमें होल्डिंग कंपनी और उसकी अन्य सहायक कंपनियों (Subsidiaries) को भी शामिल किया गया है, जिससे बड़े कॉर्पोरेट समूहों के निवेश को ‘कैप्टिव स्टेटस’ मिलना सरल हो जाएगा। नए नियमों के अनुसार, 26% या उससे अधिक हिस्सेदारी रखने वाले सदस्य अपनी पूरी बिजली खपत को कैप्टिव मान सकेंगे।

इन सुधारों का उद्देश्य ट्रांसमिशन लॉस को कम करना और ग्रिड की दक्षता बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि साफ और स्पष्ट नियमों से उद्योगों की लागत में कमी आएगी और वे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। विशेष रूप से गैर-फॉसिल ईंधन (Non-fossil fuel) अपनाने वाले उद्योगों के लिए यह एक गेम-चेंजर साबित होगा।

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