केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की नई ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) सक्षम प्रणालियों का शुभारंभ किया है। इस उन्नत तकनीक के जरिए अब उप-जिला स्तर पर अत्यंत सटीक और स्थानीय मौसम की जानकारी 10 दिन पहले ही प्राप्त की जा सकेगी। सरकार का यह कदम मौसम विज्ञान के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाने और भविष्यवाणियों की सटीकता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस नई पहल के अंतर्गत डॉ. सिंह ने 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों के लिए एआई-सक्षम मानसून पूर्वानुमान प्लेटफॉर्म राष्ट्र को समर्पित किया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के लिए विशेष तौर पर एक एआई-आधारित मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली और 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन वाली वर्षा पूर्वानुमान तकनीक भी लॉन्च की गई है। यह पायलट प्रोजेक्ट आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने मौसम सेवाओं के आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि ‘मिशन मौसम’, रडार नेटवर्क का विस्तार और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाओं में वृद्धि जैसे कदम मिलकर एक सशक्त मौसम पूर्वानुमान तंत्र का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आईएमडी अब देश के प्रशासनिक कामकाज और सार्वजनिक नीति-निर्धारण का एक अपरिहार्य हिस्सा बन चुका है। सूचनाओं के प्रसार के लिए मोबाइल ऐप, व्हाट्सएप, एसएमएस अलर्ट और किसान पोर्टल जैसे डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है ताकि अंतिम छोर तक सटीक जानकारी पहुंच सके।
मौसम की चरम घटनाओं के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम करने के लिए डॉ. सिंह ने स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों से समय पर मौसम संबंधी सलाह का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह नई प्रणाली भारत को डिजिटल रूप से सशक्त और नागरिक-केंद्रित मौसम सेवा तंत्र की दिशा में आगे ले जाएगी। उनके अनुसार, यह वैज्ञानिक प्रगति सीधे तौर पर देश की सामाजिक और आर्थिक समृद्धि में सहायक सिद्ध होगी।
इस तकनीकी विकास पर प्रकाश डालते हुए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने बताया कि ये नए मॉडल संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (NWP) और एआई-आधारित डेटा तकनीकों के मिश्रण से तैयार किए गए हैं। कृषि जैसे क्षेत्रों से स्थानीय स्तर के सटीक आंकड़ों की बढ़ती मांग को देखते हुए इन प्रणालियों को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे देश में बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा, इस उच्च-रिजॉल्यूशन सेवा को चरणबद्ध तरीके से पूरे भारत में लागू किया जाएगा।