भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता को मिली नई उड़ान, कोलकाता में बनकर तैयार हुआ अत्याधुनिक युद्धपोत ‘आईएनएस दूनागिरी’

भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता को मिली नई उड़ान, कोलकाता में बनकर तैयार हुआ अत्याधुनिक युद्धपोत ‘आईएनएस दूनागिरी’

कोलकाता के शिपयार्ड में भारतीय नौसेना के आधुनिक युद्धपोत निर्माण अभियान के अंतर्गत एक बड़ी कामयाबी हासिल की गई है, जहां स्वदेशी तकनीक से निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोत ‘आईएनएस दूनागिरी’ को तैयार कर लिया गया है। नौसेना के डिजाइन ब्यूरो के अधिकारियों, जहाज के कमांडिंग स्टाफ और इंजीनियरिंग टीम ने इस सफलता की पुष्टि की है। रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से अग्रसर है, और यह नया पोत देश की इसी घरेलू तकनीकी और डिजाइनिंग क्षमता का एक जीवंत उदाहरण है।

नेवल डिजाइन ब्यूरो से जुड़े कैप्टन मनीष प्रकाश ने इस परियोजना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस पोत की परिकल्पना, इसकी रूपरेखा तैयार करने से लेकर निर्माण तक का पूरा काम पूरी तरह से भारत में ही संपन्न हुआ है। उनके अनुसार, हाल के वर्षों में भारत ने युद्धपोतों के निर्माण और डिजाइनिंग के मामले में अपनी घरेलू विशेषज्ञता को काफी मजबूत किया है। इसी का परिणाम है कि बीते 15 महीनों में इस श्रेणी के कई अन्य जहाज नौसेना के बेड़े में शामिल किए जा चुके हैं। इस कड़ी में पी-17ए श्रेणी के ‘आईएनएस दूनागिरी’ का नौसेना में शामिल होना भारतीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है।

जहाज के तकनीकी और इंजीनियरिंग ढांचे के संबंध में जानकारी देते हुए इंजीनियर ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर पीयूष ने बताया कि इस युद्धपोत में बेहद आधुनिक प्रोपल्शन (प्रणोदन) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह उन्नत तकनीक जहाज को समंदर में बेहतरीन गतिशीलता और संचालन की क्षमता प्रदान करती है, जिससे आपात स्थितियों में इसकी रफ्तार और नियंत्रण को ज्यादा प्रभावशाली बनाया जा सकता है। वहीं, आईएनएस दूनागिरी की कमान संभाल रहीं कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्या आलोक ने इसके नामकरण पर कहा कि पी-17ए श्रेणी के इन पोतों के नाम पर्वतों के नाम पर रखने की परंपरा है, और इस लिहाज से ‘दूनागिरी’ नाम हमारी सांस्कृतिक और पौराणिक धरोहर को प्रदर्शित करता है।

इस परियोजना की गति पर बात करते हुए एग्जीक्यूटिव ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर ऋषभ ने कहा कि बहुत ही कम समय के भीतर डिजाइनिंग के स्तर से उठकर एक संपूर्ण युद्धपोत के रूप में तब्दील होना देश की जहाज निर्माण कला की श्रेष्ठता को दर्शाता है। उन्होंने इसके सामरिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इसे विशेष तौर पर पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वारफेयर) के लिए तैयार किया गया है, जो समुद्री सीमाओं के भीतर दुश्मनों की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनकी निगरानी करने में पूरी तरह सक्षम है।

युद्धपोत के रक्षा उपकरणों की जानकारी देते हुए कैप्टन कमांडर सुनील मल्होत्रा ने बताया कि आकार में छोटा होने के बावजूद यह जहाज आधुनिक हथियारों और सेंसर प्रणालियों से पूरी तरह लैस है। समंदर के खतरों से निपटने के लिए इसमें भारत में ही निर्मित सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो ट्यूब और डिकॉय सिस्टम लगाए गए हैं, जो इसे बेहद आक्रामक और सुरक्षित बनाते हैं।

इस पोत में भारतीय उद्योगों की भागीदारी को स्पष्ट करते हुए इलेक्ट्रिकल ऑफिसर कमांडर दीक्षित मन्नन ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत इस जहाज के निर्माण में प्रयुक्त 80 प्रतिशत से भी अधिक उपकरण और प्रणालियां पूरी तरह स्वदेशी हैं। बिजली उत्पादन प्रणाली, नेविगेशन सिस्टम और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम जैसे मुख्य तकनीकी तंत्र भारतीय कंपनियों द्वारा ही तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही, इसमें देश में ही विकसित की गई अत्याधुनिक संचार प्रणाली भी लगाई गई है।

यह युद्धपोत अपनी श्रेणी के अन्य जहाजों की तुलना में विशेष है, क्योंकि इसमें अत्यंत आधुनिक हाइड्रोग्राफिक्स सेंसर लगाए गए हैं, और इसकी तकनीक अन्य पोतों से पूरी तरह भिन्न है। ऑपरेशन्स रूम से इसकी कार्यप्रणाली को समझाते हुए सीनियर हाइड्रोग्राफिक सर्वेयर लेफ्टिनेंट कमांडर मनरीप सिंह ओबेरॉय ने कहा कि वे इस समय अभियान कक्ष में हैं, जहां से नौसेना के किसी भी मिशन की रूपरेखा तैयार की जाती है और उसकी निगरानी तथा क्रियान्वयन को अंजाम दिया जाता है।

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