राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार को अपनी तीन दिवसीय पूर्वी यूरोपीय देशों की यात्रा के प्रथम पड़ाव के रूप में मोल्दोवा पहुंचीं। भारत के किसी भी राष्ट्रपति द्वारा की गई यह पहली मोल्दोवा यात्रा दोनों देशों के कूटनीतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
राजधानी चिसीनाउ के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मोल्दोवा के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई ने भारतीय राष्ट्रपति की अगवानी की। राष्ट्रपति सचिवालय ने इस संबंध में जानकारी साझा की है। यह राजकीय यात्रा मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू के निमंत्रण पर आयोजित हो रही है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में और मजबूती आने की संभावना है।
प्रस्तावित कार्यसूची के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपनी समकक्ष राष्ट्रपति मैया सैंडू के साथ शीर्ष स्तरीय वार्ता में हिस्सा लेंगी। वह मोल्दोवा संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु और भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगी। इसके अलावा, वह एक व्यापारिक सम्मेलन को संबोधित करने के साथ-साथ स्थानीय भारतीय समुदाय के लोगों से भेंट करेंगी।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि भारत और मोल्दोवा के संबंध हमेशा से मित्रवत रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य आपसी सहयोग को नए आयाम देना और आर्थिक व तकनीकी साझेदारी को बढ़ाना है। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, शिक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, हरित ऊर्जा और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि राष्ट्रपति का यह दौरा व्यापार, निवेश और जन-सांख्यिकीय संपर्कों को बढ़ावा देने में अत्यंत प्रभावकारी साबित होगा।
उल्लेखनीय है कि मोल्दोवा, राष्ट्रपति मुर्मु की इस तीन-देशीय यात्रा का पहला मुख्य केंद्र है। इस ऐतिहासिक प्रवास के समाप्त होने के उपरांत, वे अपने निर्धारित कूटनीतिक कार्यक्रमों के तहत नॉर्थ मेसेडोनिया और रोमानिया के लिए रवाना होंगी। इस संपूर्ण दौरे को पूर्वी यूरोप के साथ भारत के संबंधों को प्रगाढ़ करने की दिशा में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।