देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात घटाने के लिए सरकार ने लागू किए कई नीतिगत सुधार

देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात घटाने के लिए सरकार ने लागू किए कई नीतिगत सुधार

केंद्र सरकार ने देश में कोयले का उत्पादन तेजी से बढ़ाने और विदेशी आयात पर निर्भरता खत्म करने के लिए खनन क्षेत्र में कई प्रमुख नीतिगत व प्रशासनिक बदलाव किए हैं। इन नई पहलों का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर कोयला आपूर्ति को मजबूत कर गैर-जरूरी कोयला आयात को पूरी तरह बंद करना है।

इस रणनीति के तहत खनन परियोजनाओं में तेजी लाने के उद्देश्य से सरकार कोयला ब्लॉकों के विकास की लगातार समीक्षा कर रही है। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2021 के नियमों को कड़ाई से लागू करने के साथ ही ‘सिंगल विंडो क्लियरेंस पोर्टल’ जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। इसके अलावा, ब्लॉक आवंटियों को विभिन्न सरकारी स्वीकृतियां समय पर दिलाने के लिए एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) की भी स्थापना की गई है।

व्यावसायिक कोयला खनन नीति की शुरुआत जून 2020 में हुई थी, जिसके माध्यम से अब तक 132 कोयला ब्लॉकों का आवंटन किया जा चुका है। वर्तमान में इनमें से 23 ब्लॉकों को खदान शुरू करने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है, जबकि 15 खदानों से उत्पादन कार्य भी शुरू हो चुका है। बाकी बचे ब्लॉकों में निर्धारित समय-सारणी के अनुसार काम आगे बढ़ रहा है।

परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के उद्देश्य से सरकार ने पूर्ण रूप से खोजे गए कोयला ब्लॉकों के विकास की समयसीमा 51 महीने से घटाकर 40 महीने तय कर दी है। इसी तरह, आंशिक रूप से खोजे गए ब्लॉकों के लिए यह अवधि 66 महीने से कम करके 52 महीने कर दी गई है। इसके साथ ही, कोयला गैसीकरण और द्रवीकरण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से वाणिज्यिक खनन में विशेष छूट व इंसेंटिव दिए जा रहे हैं।

निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने 100 प्रतिशत स्वचालित मार्ग से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी है। साथ ही, पारदर्शी राजस्व साझाकरण मॉडल और आसान बोली शर्तों जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे निजी कंपनियां इस क्षेत्र में रुचि दिखा रही हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) आधुनिक मास प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी, सतत खनन मशीनों, लॉन्गवॉल और हाईवॉल जैसी आधुनिक तकनीकों के सहारे अपनी उत्पादन क्षमता में इजाफा कर रही है। दूसरी तरफ, सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) नई परियोजनाओं पर काम करने के साथ-साथ कोयला परिवहन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का भी तेजी से विस्तार कर रही है।

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इन समन्वित प्रयासों से आने वाले समय में घरेलू कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी, जिससे भारत की आयात पर निर्भरता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

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