भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के अंतर्गत मंगलवार को चंडीगढ़ में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) विषय पर उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा आयुष मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सत्र में नौ ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस आयोजन में टीसीआईएम क्षेत्र में आपसी तालमेल मजबूत करने और एक समर्पित ब्रिक्स एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप (ईडब्ल्यूजी) स्थापित करने पर पूर्ण सहमति दर्ज की गई।
इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों ने प्रमुखता से शिरकत की। यह सम्मेलन “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” की केंद्रीय अवधारणा के तहत आयोजित किया गया था, जहां सभी देशों ने अपनी नीतियों, सर्वोत्तम अभ्यासों और वैज्ञानिक प्रगति से जुड़े अनुभवों को साझा किया।
समारोह का शुभारंभ आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के स्वागत भाषण के साथ हुआ। बैठक के दौरान उपस्थित सदस्य राष्ट्रों के अनुमोदन से ब्रिक्स एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप के नियम व शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) को अंतिम रूप प्रदान किया गया। इसके साथ ही नीतिगत समन्वय, संस्थागत भागीदारी को प्रगाढ़ करने और भविष्य में सहयोग के नए रास्तों की खोज पर विस्तृत चर्चा हुई।
इसी क्रम में आयुष मंत्रालय ने क्षमता निर्माण, शिक्षा और मानव संसाधन विकास पर केंद्रित एक विशेष सत्र का आयोजन किया। इसमें वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को सशक्त बनाने के उद्देश्य से अकादमिक साझेदारियों, आयुष छात्रवृत्ति योजनाओं, शिक्षक व छात्र विनिमय कार्यक्रमों और साक्ष्य-आधारित अनुसंधान व्यवस्था पर बल दिया गया।
सम्मेलन के दौरान आयुष सचिव द्वारा ‘आयुष ज़ोन’ का उद्घाटन किया गया, जहां प्रतिनिधियों ने भारत की समृद्ध जड़ी-बूटी विरासत, वेलनेस परामर्श, अनुसंधानों और आयुष आहार का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। इसके अतिरिक्त, चार दिवसीय ब्रिक्स हेल्थ ट्रैक के तहत प्रतिनिधियों के लिए राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) के सहयोग से आयुष आहार मेला, चेयर योग, वाई-ब्रेक और ‘फिट इंडिया रन’ जैसी कई स्वास्थ्य संवर्धक गतिविधियों का भी आयोजन किया जा रहा है।