केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के प्रसार पर रोक लगाने के लिए नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में इस संबंध में जानकारी दी। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अवैध और नुकसानदेह सामग्री के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करनी होगी, जिसमें कंटेंट हटाने की समयावधि में भी भारी कटौती की गई है।
डिजिटल माध्यमों पर बाल यौन शोषण से संबंधित विज्ञापनों और सामग्रियों के सामने आने के बाद सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए संबंधित कंपनियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की ओर से भी संबंधित प्लेटफॉर्म्स को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत ऑनलाइन धोखाधड़ी, निजता के हनन, पहचान छिपाने और बाल यौन शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री के प्रसारण जैसे साइबर अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इन मामलों की प्रभावी जांच के लिए कानूनी अधिकार भी प्रदान किए गए हैं।
आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के तहत मध्यस्थों और सोशल मीडिया कंपनियों पर अपने मंचों से गैर-कानूनी, अश्लील तथा बच्चों को नुकसान पहुँचाने वाले कंटेंट को रोकने की पूर्ण जिम्मेदारी तय की गई है। नए मानकों के अनुसार, किसी पीड़ित या उसके प्रतिनिधि की शिकायत पर पूर्ण या आंशिक नग्नता, अश्लीलता या मॉर्फ्ड तस्वीरों जैसी संवेदनशील सामग्रियों को दो घंटे के भीतर हटाना या उन तक पहुँच रोकना अनिवार्य होगा।
अदालत अथवा सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर गैर-कानूनी सामग्री को हटाने की अधिकतम सीमा, जो पहले 36 घंटे थी, उसे घटाकर अब मात्र तीन घंटे कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, शिकायत निवारण की प्रक्रिया को भी त्वरित बनाते हुए संवेदनशील मामलों में दो घंटे और सामान्य मामलों में अधिकतम 36 घंटे की सीमा तय की गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए भी नियमों को और सशक्त बनाया गया है। अब सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना, ट्रैक करने योग्य मेटाडेटा रखना और अवैध एआई-जनित विजुअल्स की पहचान कर उन्हें रोकने वाले तकनीकी उपाय लागू करना अनिवार्य होगा। इसमें बिना सहमति वाली अंतरंग तस्वीरें और बाल यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट प्रमुखता से शामिल है।
प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे स्वचालित (ऑटोमेटेड) तकनीकी टूल विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं जो बलात्कार, बाल यौन शोषण और पूर्व में हटाई जा चुकी समान आपत्तिजनक सामग्री को दोबारा अपलोड होने से तुरंत रोक सकें। इसके अलावा, प्रमुख मैसेजिंग सेवाओं के लिए गंभीर अपराधों, राष्ट्रीय सुरक्षा और बाल शोषण के मामलों में संदेश के सबसे पहले प्रेषक (फर्स्ट ओरिजिनेटर) की पहचान सुनिश्चित करने का प्रावधान भी लागू रहेगा।
정부 (सरकार) ने यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी सोशल मीडिया मध्यस्थ इन आईटी नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (‘सेफ हार्बर’) से वंचित कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में उस प्लेटफॉर्म के खिलाफ देश के प्रचलित कानूनों के तहत सीधी कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार समय-समय पर परामर्श और मानक संचालन प्रक्रियाएं भी जारी कर रही है। इसमें 29 दिसंबर 2025 को जारी एडवाइजरी के माध्यम से गैर-कानूनी सामग्री पर रोक और आंतरिक समीक्षा के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 11 नवंबर 2025 को बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरों के प्रसार को रोकने हेतु एक एसओपी (SOP) लागू की गई और 16 मार्च 2026 को एआई-जनित भ्रामक व आपत्तिजनक कंटेंट पर नियंत्रण के लिए नए निर्देश जारी किए गए।