केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) कार्यक्रम के तहत देश भर के 773 जिलों में 1,244 विशिष्ट उत्पादों को चिन्हित किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय उत्पादों को बढ़ावा देकर स्थानीय उद्योगों, रोजगार के अवसरों और निर्यात क्षमता को मजबूत करना है।
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि ‘डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब्स’ पहल के माध्यम से 734 जिलों में निर्यात क्षमता वाले उत्पादों और सेवाओं की पहचान पूरी कर ली गई है। सरकार का लक्ष्य जमीनी स्तर पर व्यापार को गति देना और स्थानीय निर्मित वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है।
योजना के सुचारू संचालन और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य और जिला स्तरीय निर्यात संवर्धन समितियों (SEPC और DEPC) को क्रियान्वित किया गया है। उत्पादन से लेकर निर्यात तक की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से अब तक 249 जिला निर्यात कार्य योजनाओं (DEAP) को मंजूरी देकर अपनाया जा चुका है।
डिजिटल बाजार में स्थानीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने हेतु गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर एक विशेष ओडीओपी स्टोरफ्रंट तैयार किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर 500 से अधिक श्रेणियों के अंतर्गत 1,300 से ज्यादा उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 10 से अधिक राज्यों ने अपने स्वतंत्र ई-कॉमर्स पोर्टल भी विकसित किए हैं।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के मार्गदर्शन में चल रही इस योजना में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें अपने प्रत्येक जिले से कम से कम एक प्रमुख उत्पाद का चयन करती हैं। इन उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग, विपणन, प्रदर्शनियों में भागीदारी और कारीगरों के क्षमता निर्माण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार यूनिटी मॉल (पीएम एकता मॉल) की स्थापना के लिए ‘स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इनवेस्टमेंट’ (SASCI) के तहत राज्यों को 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त 200 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दे रही है। इन मॉलों में ओडीओपी, जीआई टैग और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, पीएमएफएमई योजना के जरिए खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को 35% क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये) तथा ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए 50% तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है।