अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने नीतिगत ब्याज दरों को रखा यथावत, महंगाई के मुद्दे पर समिति में उभरी असहमति

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने नीतिगत ब्याज दरों को रखा यथावत, महंगाई के मुद्दे पर समिति में उभरी असहमति

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर (फेडरल फंड्स रेट) को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के मौजूदा दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया है। हाल ही में संपन्न हुई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में यह निर्णय 9-3 के बहुमत से लिया गया। हालांकि, इस फैसले के दौरान देश में मुद्रास्फीति के दबाव और भविष्य के आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर नीति निर्माताओं के बीच तीखे मतभेद भी सामने आए।

केंद्रीय बैंक ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह फैसला मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने और देश में अधिकतम रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के उसके दोहरे जनादेश (Dual Mandate) के अनुरूप लिया गया है। फेड के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और कई वैश्विक अनिश्चितताओं की चुनौतियों के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास गति मजबूत बनी हुई है। देश में पूंजी निवेश, उत्पादकता और रोजगार सृजन में निरंतर सुधार देखा जा रहा है, जबकि बेरोजगारी दर भी एक नियंत्रित स्तर पर स्थिर बनी हुई है।

हालांकि, मौद्रिक समीक्षा में स्वीकार किया गया कि महंगाई की दर अब भी केंद्रीय बैंक के निर्धारित 2 प्रतिशत के दीर्घकालिक लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। ऊर्जा क्षेत्र सहित कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के कारण उपभोक्ता कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने दोहराया कि वह महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण पाने और अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस बार की नीतिगत बैठक इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि समिति के तीन सदस्यों—बेथ एम. हैमैक, नील काशकारी और लॉरी के. लोगन—ने दरों को स्थिर रखने के बजाय इनमें 25 आधार अंकों (बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी के पक्ष में अपना वोट दिया। पिछले कई वर्षों के दौरान फेड के भीतर इतनी बड़ी असहमति का यह पहला प्रमुख मामला माना जा रहा है। आगामी सितंबर की बैठक के रुझानों पर फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श ने कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया और कहा कि नीति-निर्धारण संस्था में अलग-अलग दृष्टिकोण होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक स्वाभाविक अंग है।

फेड के इस निर्णय और समिति के भीतर मतभेदों के सार्वजनिक होने के बाद अमेरिकी वित्तीय बाजारों में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी दर्ज की गई, जबकि शेयर बाजार में भारी बिकवाली का माहौल रहा। प्रमुख शेयर सूचकांक एसएंडपी 500 में 1.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 7,316 पर बंद हुआ, जबकि प्रौद्योगिकी शेयरों वाला नैस्डैक सूचकांक 1.74 प्रतिशत टूटकर 24,442 अंक के स्तर पर आ गया।

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