नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को उन सभी आरोपों का औपचारिक खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि बड़े मूल्य के यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने का निर्णय अमेरिकी दबाव में लिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार यूपीआई के माध्यम से केवल रुपे क्रेडिट कार्ड से लेन-देन की अनुमति है, अतः इस व्यवस्था से विदेशी क्रेडिट कार्ड कंपनियों को किसी प्रकार का लाभ मिलने का कोई आधार नहीं है।
वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने यह स्थिति अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की वर्ष 2026 की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों के संदर्भ में स्पष्ट की है। उक्त रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि भारत के यूपीआई ढांचे में अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रदाताओं को घरेलू रुपे कार्ड जैसी समान सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस पर डीएफएस ने स्पष्ट किया कि एनपीसीआई द्वारा 15 सितंबर को जारी परिपत्र में रुपे के अतिरिक्त किसी अन्य क्रेडिट कार्ड से यूपीआई पर लेन-देन की मंजूरी नहीं दी गई है। विभाग ने इस कदम को किसी विदेशी प्रभाव का परिणाम बताने वाले दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक करार दिया।
यह स्पष्टीकरण तब सामने आया है जब कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला विदेशी दबाव में हुआ है। दूसरी ओर, एनपीसीआई का कहना है कि उच्च मूल्य वाले चुनिंदा लेन-देन पर यह दर लागू करने का वास्तविक उद्देश्य यूपीआई तंत्र को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाना है। इससे छोटे थर्ड-पार्टी ऐप प्रदाताओं को बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा करने का अवसर प्राप्त होगा।
एनपीसीआई ने पूर्व में नवंबर 2020 के दौरान थर्ड-पार्टी ऐप प्रदाताओं के लिए अधिकतम 30 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी तय की थी। हालांकि, एक सतत राजस्व मॉडल के अभाव में बाजार की प्रमुख बड़ी कंपनियों के अतिरिक्त अन्य संस्थाएं प्रभावी प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ थीं।
नए प्रावधानों के तहत आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू किया जाएगा। यह राशि व्यापारी द्वारा वहन की जाएगी और 75,000 रुपये अथवा उससे अधिक के लेन-देन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। इसके विपरीत, सामान्य व्यक्तियों के आपसी लेन-देन (पी2पी) और रोजमर्रा के छोटे कारोबारी भुगतान इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।
रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी बुनियादी जनोपयोगी सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से ऊपर के लेन-देन पर पांच रुपये का निश्चित शुल्क देय होगा। वहीं, म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार से जुड़े लेन-देन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये तक हो सकता है। मासिक आधार पर क्यूआर कोड से एक लाख रुपये तक का संग्रह करने वाले छोटे कारोबारी इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतान पर भी कोई एमडीआर नहीं लगेगा।