जापान के नागोया में जारी एशियन गेम्स 2026 के अंतर्गत पुरुष मैराथन स्पर्धा में भारत के राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक धावक सावन बरवाल ने रजत पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। 42.195 किलोमीटर की इस प्रतिष्ठित दौड़ में बरवाल के दूसरे स्थान पर रहने के साथ ही एशियाई खेलों की पुरुष मैराथन में भारत का 44 साल लंबा पदकों का सूखा आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है।
एशियाड के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय धावक ने देश से बाहर विदेशी सरजमीं पर पुरुष मैराथन स्पर्धा में कोई पदक जीता है। भारत को 1982 के बाद पहली बार इस खेल में सफलता हाथ लगी है। इस उपलब्धि के साथ एशियाई खेलों की मैराथन में भारत की ऐतिहासिक पदक तालिका में चौथा पदक दर्ज हो गया है। इससे पहले 1951 के संस्करण में छोटा सिंह ने स्वर्ण और सूरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक हासिल किया था, जबकि 1982 में होसुर कुक्कप्पा सीतारण ने कांस्य पदक जीता था।
प्रतियोगिता का आगाज भारतीय समयानुसार तड़के 4:00 बजे हुआ। कुल 19 धावकों की इस प्रतिस्पर्धी फील्ड में बरवाल के साथ साथी भारतीय धावक कार्तिक करकेरा भी मैदान में थे। बरवाल ने शुरुआत से ही अग्रणी धावकों की कतार में अपनी जगह सुनिश्चित रखी। रेस का आधा फासला पूरा होने तक वह दूसरे पायदान पर आ चुके थे और उन्होंने अंत तक अपना यह स्थान नहीं खोया।
रेस जब 35 किलोमीटर के निर्णायक बिंदु पर पहुंची, तब बरवाल 1:49:29 के दर्ज समय के साथ दूसरे क्रम पर बने रहे। अंतिम सात किलोमीटर के दौरान वह आगे चल रहे जापान के एथलीट इचिताका यामाशिता के पीछे थे। जापानी धावक द्वारा बड़ा अंतर बनाने के बाद भी बरवाल ने अंतिम चरण तक अपना संतुलन और लय बनाए रखी तथा रजत पदक अपने नाम किया।
मुकाबले में उतरे दूसरे भारतीय धावक कार्तिक करकेरा ने 2:22:41 में अपनी रेस समाप्त की और वह अंतिम परिणाम तालिका में 17वें क्रम पर रहे।