लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शनिवार को भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय स्थित ज्ञान-विज्ञान भवन में आयोजित ‘भोपाल विज्ञान मेला’ के समापन सत्र में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान का मुख्य लक्ष्य जनजीवन को सुगम बनाना और सामुदायिक समस्याओं का सटीक निदान खोजना होना चाहिए।
मंत्री श्री सिंह ने छात्रों को प्रेरित करते हुए स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक अनुसंधान केवल सम्मान या ट्रॉफी जीतने का माध्यम नहीं हैं। उनका वास्तविक उद्देश्य दैनिक जीवन की वास्तविक अड़चनों को सुलझाना होना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज के इन प्रतिभाशाली नवाचारियों में से ही आगे चलकर देश के अग्रणी डॉक्टर, शोधकर्ता और राष्ट्रनिर्माता तैयार होंगे।
आयोजन की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने विज्ञान भारती और विश्वविद्यालय प्रबंधन के प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मॉडल सिर्फ देखने-दिखाने के लिए नहीं हैं, बल्कि वे वर्तमान समय की समस्याओं को दूर करने और भविष्य की जरूरतों की पूर्ति में बड़े साधन बन सकते हैं। नवोदित वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन देने के लिए ऐसा मंच उपलब्ध कराना एक उपयोगी कदम है।
श्री सिंह ने भारत की ऐतिहासिक बौद्धिक संपदा का स्मरण कराते हुए कहा कि ज्ञान और वैज्ञानिक समझ हमारे इतिहास के अभिन्न अंग रहे हैं। गणित में शून्य की खोज से लेकर खगोल और जलवायु अध्ययन में भारतीय विद्वानों का कार्य अद्वितीय रहा है। महाकवि कालिदास के ग्रंथ ‘मेघदूत’ में मौजूद मानसूनी हवाओं, मौसम और प्राकृतिक परिवर्तनों का गहन विवरण इस बात का प्रमाण है कि हमारा प्राचीन चिंतन कितना वैज्ञानिक और व्यापक था।
अपने विभाग के कामकाज का विवरण देते हुए उन्होंने साझा किया कि लोक निर्माण विभाग की निर्माण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए एक वैज्ञानिक आधार विकसित किया गया है। विभाग के इंजीनियरों ने भास्कराचार्य संस्थान के तकनीकी सहयोग से निर्माण अवधि के सटीक निर्धारण हेतु देश का पहला विशेष मॉड्यूल निर्मित किया है। यह तकनीकी सोच और समाधानपरक कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष परिणाम है।
छात्रों को निरंतर प्रश्न करने और प्रयोगधर्मी बने रहने की सलाह देते हुए मंत्री ने कहा कि समाजोपयोगी समाधान ही वास्तविक नवप्रवर्तन कहलाते हैं और यही देश सेवा का आधार हैं। इस समापन समारोह में आयोजन समिति के अध्यक्ष व म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, विज्ञान भारती मध्यभारत प्रांत के अध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र कुमार स्वामी, डॉ. पवन मिश्रा सहित कई शिक्षाविद्, अधिकारी, कर्मचारी, अभिभावक और छात्र उपस्थित रहे।