रूसी प्रशासन ने शुक्रवार को देश के पहले युद्धकालीन संसदीय चुनाव के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए, जिसमें सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी ने निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ में तीन-चौथाई से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है। रविवार को संपन्न हुए तीन दिवसीय मतदान के बाद आए इन नतीजों से संसद पर क्रेमलिन की पकड़ और अधिक सुदृढ़ होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं।
केंद्रीय चुनाव आयोग (सीईसी) के अनुसार, ड्यूमा की कुल 450 सीटों में से यूनाइटेड रशिया ने रिकॉर्ड 349 सीटों पर विजय प्राप्त की है। इस पूरी चुनावी प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर नियंत्रित रखा गया, जिसके चलते वास्तविक विपक्षी ताकतों को चुनावी मैदान से लगभग पूरी तरह बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
आयोग की प्रमुख एला पमफिलोवा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश के 11.1 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 60 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह मतदान प्रतिशत पिछले एक दशक से अधिक समय में हुए किसी भी संसदीय चुनाव की तुलना में सबसे अधिक दर्ज किया गया है। भागीदारी में सुधार लाने के मकसद से प्रशासन ने तीन दिनों की मतदान अवधि के साथ-साथ चुनिंदा क्षेत्रों में ऑनलाइन वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई थी।
साल 2022 में यूक्रेन पर शुरू हुई सैन्य कार्रवाई के बाद रूस में कराया गया यह पहला आम चुनाव था। इस प्रक्रिया के अंतर्गत उन चार यूक्रेनी क्षेत्रों के निवासियों को भी मतदान में शामिल किया गया, जिन पर उसी वर्ष रूस ने नियंत्रण स्थापित कर उन्हें अपने भूभाग में मिला लिया था।
इसके साथ ही वर्ष 2014 में रूस के नियंत्रण में आए क्रीमिया प्रायद्वीप में भी मतदान संपन्न कराया गया। हालांकि, यूक्रेन ने इन सभी क्षेत्रों में आयोजित चुनावी प्रक्रिया को सिरे से खारिज करते हुए इसे गैर-कानूनी करार दिया है।
चुनावी नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को कहा कि यह जनमत क्रेमलिन की वर्तमान नीतियों पर जनता के गहरे भरोसे और समर्थन का प्रमाण है।