संयुक्त राष्ट्र में शुक्रवार को आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हंगामा करने वाले एक पाकिस्तानी रिपोर्टर को शांत कराते हुए सवाल किया कि क्या कोई आतंकवादी मुल्क उनसे यह बात पूछ रहा है।
यह संयुक्त प्रेस वार्ता विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यांती द्वारा समुद्री जहाजों व नाविकों की हिफाजत से जुड़े ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ की औपचारिक शुरुआत के अवसर पर रखी गई थी। बातचीत के बीच में ही जब पाकिस्तानी पत्रकार ने अड़चन डाली, तो विदेश मंत्री ने सहज भाव से मुस्कुराते हुए उसे संक्षिप्त व तीखा उत्तर दिया। इसके बाद भी जब वह रिपोर्टर लगातार चिल्लाता रहा, तब संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विदेश मंत्री अपनी बात पूरी स्पष्टता से कह चुके हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब गुरुवार को पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम शहबाज शरीफ भी संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारतीय पत्रकारों के प्रश्नों के सामने असहज दिखाई दिए थे। यूएन महासभा के मुख्य द्वार पर जब उनसे आतंकवादियों को पनाह देने पर रोक लगाने और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर अदालत में मुकदमा चलाने को लेकर प्रश्न दागे गए, तो शरीफ ने कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया। वायरल वीडियो फुटेज के अनुसार, परिसर में प्रवेश करते तथा बाहर निकलते समय पूछे गए इन तीखे सवालों पर उन्होंने केवल अपनी चाल तेज कर ली और मौन साधे वहां से निकल गए।
हाफिज सईद पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी गुट लश्कर का मुख्य संचालक और भारत के लिए मोस्ट वांटेड आतंकी है। उस पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक पाबंदियां लगा रखी हैं, जबकि अमेरिका ने उसके ऊपर एक करोड़ डॉलर की इनामी राशि तय कर रखी है।
इससे पूर्व बुधवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भी भारत ने पाकिस्तान के रवैये की तीखी आलोचना की थी। भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान को नसीहत दी थी कि वह सीमा पार से आतंक फैलाने के बजाए राहत पैकेजों (बेलआउट) पर टिकी अपनी जर्जर अर्थव्यवस्था को संभालने पर ध्यान दे। उन्होंने दो टूक कहा था कि भड़काऊ रुख अपनाने से देश की आर्थिक बदहाली छिप नहीं सकती।
त्यागी ने परिषद के समक्ष पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों के हनन का ब्योरा रखते हुए कहा कि प्रशासन ने आवश्यक भोजन, तेल और दवाओं की आवाजाही बाधित कर दी है तथा प्रदर्शनकारियों पर हिंसक बल प्रयोग किया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले शुक्रवार को भी यह बात परिषद के संज्ञान में लाई गई थी कि जून महीने से अब तक पीओके में दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं और इस्लामाबाद-रावलपिंडी में विद्यार्थियों को गिरफ्तार किया गया है। भारत द्वारा इन वास्तविकताओं को उजागर किए जाने पर पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रक्रियात्मक नियमों (प्वाइंट ऑफ ऑर्डर) की आड़ लेने का प्रयास किया।