नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास तथा संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने वृत्तचित्र श्रृंखला ‘द एनचैंटिंग 8: ए कलिनरी जर्नी थ्रू द नॉर्थईस्ट’ का ट्रेलर औपचारिक रूप से जारी किया। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) और नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (एनईसी) की इस संयुक्त पहल का मकसद पूर्वोत्तर के आठों राज्यों की पाक संस्कृति, स्थानीय संसाधनों, जनजातीय समुदायों और सांस्कृतिक विविधता को देश भर के दर्शकों से रूबरू कराना है। लोकार्पण समारोह में एमडीओएनईआर राज्य मंत्री डॉ. सुकांता मजूमदार सहित मंत्रालय के उच्चाधिकारी और प्रोडक्शन टीम के सदस्य उपस्थित थे।
‘द एनचैंटिंग 8’ दर्शकों को पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के खान-पान और स्वाद के अनूठे संसार की यात्रा कराती है। श्रृंखला में भोजन को माध्यम बनाकर वहां के लोकजीवन, हस्तकला, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य को एक सूत्र में पिरोया गया है। स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों की मदद से पूर्वोत्तर के सामाजिक ताने-बाने को समग्रता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
इस वृत्तचित्र की मूल संरचना जमीनी स्तर के अनुभवों पर केंद्रित है। इसमें स्थानीय किसानों, उत्पादकों और ग्रामीण समाज को मुख्य कथावाचक के रूप में सामने रखा गया है। खाद्य सामग्रियों के उनके मूल प्राकृतिक परिवेश से लेकर घरेलू रसोइयों और परोसे जाने तक के पूरे सफर को बेहद बारीकी से दर्शाया गया है।
वृत्तचित्र में इस तथ्य को विशेष तौर पर उभारा गया है कि पूर्वोत्तर का भोजन कोई इकहरी व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह भिन्न-भिन्न जलवायु और समुदायों के बीच विकसित हुई अलग-अलग परंपराओं का संगम है। स्थानीय लोगों की जुबानी उनके पारंपरिक ज्ञान, घरेलू नुस्खों और भोजन पकाने की सदियों पुरानी विधियों को इसमें स्वाभाविक ढंग से दर्ज किया गया है।
परियोजना का धरातल पर क्रियान्वयन पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन समिति (एनईआरसीआरएमएस) द्वारा किया गया है। इस श्रृंखला का निर्माण अर्बन मीडिया प्रोडक्शंस ने फिलांडरिंग फोर्कर मीडिया के सहयोग से पूरा किया है।
सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने के साथ-साथ यह पहल क्षेत्र के कृषि उत्पादों और ग्रामीण समुदायों की आर्थिक संभावनाओं को भी नए अवसर प्रदान करेगी। व्यापक दर्शक वर्ग तक इन परंपराओं को पहुंचाकर श्रृंखला उन लोगों के योगदान को सामने लाती है, जो पीढ़ियों से पूर्वोत्तर की इस अनमोल पाक धरोहर को जीवित रखे हुए हैं।