भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने शुक्रवार को नागोया में जारी एशियाई खेल 2026 की कुश्ती स्पर्धा के पुरुषों के 65 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में ताजिकिस्तान के पहलवान के खिलाफ 2-9 से पिछड़ने के बावजूद 23 वर्षीय सुजीत ने असाधारण धैर्य और कौशल का परिचय देते हुए 10-9 से मुकाबला जीतकर एशियाई खेलों का अपना पहला पीला तमगा हासिल किया।
खिताबी भिड़ंत में ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदिएव ने भारतीय पहलवान के सामने कड़ी चुनौती रखी। पहले पीरियड में कुदिएव ने ‘आर्म लॉक’ दांव का प्रभावी इस्तेमाल कर सुजीत को कोई भी आक्रमण करने का अवसर नहीं दिया और बड़ी बढ़त बना ली। हालांकि, खेल आगे बढ़ने पर सुजीत ने विपक्षी खिलाड़ी की रणनीति को समझा और अपनी गति का फायदा उठाते हुए लगातार आक्रामक दांव खेले। बार-बार ताजिक पहलवान के पीछे जाकर टेक-डाउन करने की रणनीति के दम पर सुजीत ने अंतर को 8-9 तक पहुंचा दिया। मुकाबले के अंतिम 20 सेकेंड में भारतीय पहलवान ने निर्णायक टेक-डाउन करते हुए स्कोर 10-9 कर दिया और अपनी बढ़त बरकरार रखकर खिताबी जीत सुनिश्चित की।
सुजीत का इस स्वर्ण पदक तक पहुंचने का सफर बेहद प्रभावशाली रहा, जहां उन्होंने विश्व स्तर के दिग्गज पहलवानों को धूल चटाई। प्रतियोगिता की शुरुआत में उन्होंने अफगानिस्तान के सैयद उमर जजई को 13-3 से पराजित किया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में ईरान के अब्बास इब्राहिमजादेहसवादकुही के विरुद्ध शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाते हुए पहले पीरियड में 8-0 की बढ़त बनाई और दूसरे पीरियड में बिना कोई अंक गंवाए 10-0 से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर मुकाबला जीत लिया।
सेमीफाइनल में सुजीत ने पेरिस ओलंपिक चैंपियन जापान के कोतारो कियोका को हराकर बड़ा उलटफेर किया। पहले पीरियड में 0-2 से पिछड़ने के बाद भारतीय पहलवान ने दूसरे पीरियड में तीन अंक जुटाए, जबकि जापानी प्रतिद्वंद्वी केवल एक अंक हासिल कर सके। मुकाबला समाप्त होने पर स्कोर 3-3 से बराबरी पर था, लेकिन उच्च मूल्य वाला दांव लगाने के नियम के तहत सुजीत को विजेता घोषित कर फाइनल का टिकट दिया गया।
सुजीत के लिए यह ऐतिहासिक जीत पिछले एक वर्ष के निरंतर प्रदर्शन की परिणति है, जिसके दौरान उन्होंने अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप, एशियाई चैंपियनशिप, जगरेब ओपन और तिराना में खिताब अपने नाम किए। जून में मंगोलियन ओपन के दौरान घुटने की चोट के कारण हटने को छोड़ दें, तो वह पूरे सत्र में अजेय रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले एशियाई खेलों के दौरान तदर्थ समिति द्वारा बजरंग पूनिया को सीधे प्रवेश देने के फैसले के खिलाफ सुजीत ने कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी, जहां उन्हें राहत नहीं मिली थी; परंतु इस बार उन्होंने मैट पर खुद को 2028 ओलंपिक पदक का प्रबल दावेदार साबित कर दिया।
शुक्रवार को मैट पर उतरे अन्य भारतीय पहलवानों के लिए दिन मिला-जुला रहा। महिलाओं के 50 किग्रा प्री-क्वार्टर फाइनल में दीपांशी फोगाट को जापान की शीर्ष पहलवान युई सुसाकी के हाथों 0-10 से शिकस्त झेलनी पड़ी। हालांकि, सुसाकी के फाइनल में पहुंचने से दीपांशी को रेपेचेज का मौका मिला, जहां उन्होंने कंबोडिया की समनांग डित को 10-0 से हराकर कांस्य पदक मुकाबले में कजाकिस्तान की जेनिप बयानोवा के खिलाफ स्थान तय किया। पुरुषों के 125 किग्रा वर्ग में रजत रुहुल कजाकिस्तान के येदिगे कासिमबेकिन से 3-8 से और महिलाओं के 76 किग्रा वर्ग में प्रिया मलिक किर्गिस्तान की ऐपेरी मेडेट किजी से 1-6 से हारकर बाहर हो गईं। शनिवार को ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत, दीपक पूनिया, अंतिम पंघाल और मनीषा भानवाला अपनी श्रेणियों में दावेदारी पेश करेंगे।