भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बुधवार को सर्वसम्मति से रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों में कमी की कोई संभावना नहीं है और भविष्य में केवल दर वृद्धि या यथास्थिति बनाए रखने का विकल्प ही खुला रहेगा।
तीन दिवसीय नीतिगत समीक्षा बैठक के नतीजों की जानकारी देते हुए गवर्नर ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने अपना रुख बदलते हुए अब ‘संतुलित सख्ती’ (कैलिब्रेटेड टाइटनिंग) की नीति अपनाने का फैसला किया है। इस नीतिगत बदलाव के तहत लिक्विडिटी प्रबंधन से जुड़ी दरों को भी संशोधित किया गया है, जिसमें स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) को 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) व बैंक दर को 5.75 प्रतिशत तय किया गया है।
गवर्नर मल्होत्रा ने आगे की नीतिगत दिशा स्पष्ट करते हुए कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला कितना लंबा खिंचेगा और इसकी सीमा क्या होगी, यह आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्थिक वृद्धि और महंगाई के वास्तविक आंकड़े, अंतर्निहित मुद्रास्फीति की स्थिति, मूल्य दबावों का फैलाव तथा आपूर्ति संबंधी झटकों का प्रभाव ही आगे के फैसलों का आधार बनेंगे।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर आरबीआई का अनुमान है कि आगामी तीन तिमाहियों के दौरान औसत खुदरा महंगाई (सीपीआई) लगभग 5.8 प्रतिशत के स्तर पर रह सकती है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए कोर मुद्रास्फीति के करीब 4.94 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की है।
देश के व्यापक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए आरबीआई प्रमुख ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। निजी खपत की स्थिति बेहतर है और विवेकाधीन खर्चों से इसे सहारा मिल रहा है। इसके अलावा, कई प्रमुख आर्थिक संकेतकों के आधार पर स्थायी निवेश की स्थिति भी संतोषजनक नजर आ रही है।
सेवा क्षेत्र के संबंध में उन्होंने कहा कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग के बल पर यह क्षेत्र तेज गति बनाए हुए है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और सर्विसेज पीएमआई दोनों ही विस्तार के दायरे में बने रहे, जो निरंतर आर्थिक गतिविधियों का स्पष्ट संकेत है। हालांकि, गवर्नर ने यह भी रेखांकित किया कि गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की मांग और घरेलू विमान यात्रियों की संख्या जैसे कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में सुस्ती के संकेत देखे गए हैं।