मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक: सरकार प्रमुख के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों का नीतिगत सफरनामा

मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक: सरकार प्रमुख के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों का नीतिगत सफरनामा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से शुरू कर वर्ष 2026 में सरकार के प्रमुख के रूप में अपने 25 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस अवधि में उन्होंने लगभग 13 वर्ष गुजरात का नेतृत्व किया और 2014 से निरंतर देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाल रहे हैं। यह कालखंड केवल समय की गणना नहीं, बल्कि राज्य स्तर से लेकर केंद्र तक शासन की कार्यशैली, विकास के मानकों और आर्थिक प्राथमिकताओं के सतत रूपांतरण का अध्ययन प्रस्तुत करता है।

गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रबंधन, औद्योगिक निवेश और संस्थागत सुधारों पर प्राथमिक जोर दिया था। वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद इन्हीं प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया गया। जनधन योजना ने करोड़ों वंचितों को बैंकिंग तंत्र से जोड़ा, जिसे बाद में बायोमेट्रिक पहचान और मोबाइल नेटवर्क से जोड़कर पारदर्शी कल्याण व्यवस्था में बदला गया। यूपीआई और डिजिटल भुगतान तंत्र ने औपचारिक वित्तीय सेवाओं का लोकतंत्रीकरण किया, जिससे नीति निर्माण और सेवा वितरण सीधे तकनीक आधारित हो गया।

सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर सुधारने के लिए कई बड़े अभियान संचालित किए गए। स्वच्छ भारत मिशन ने शौचालय निर्माण और स्वच्छता को व्यापक विमर्श में बदला, तो वहीं उज्ज्वला, पीएम आवास और जल जीवन मिशन ने बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की। आयुष्मान भारत योजना के तहत निर्धन परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई, और कोविड-19 संकट के समय डिजिटल प्रमाणन व बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन की क्षमता को रेखांकित किया। कृषि क्षेत्र में पीएम-किसान सम्मान निधि के माध्यम से अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की सीधी आर्थिक मदद किसानों तक पहुंचाई गई है।

महिलाओं की भूमिका को सिर्फ लाभार्थी तक सीमित न रखकर लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों से तकनीकी व आर्थिक भागीदारी से जोड़ा गया। अर्थव्यवस्था के स्तर पर जीएसटी ने अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एकीकृत किया, जिसके चलते पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 के 60 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ के पार पहुंच गई। पूंजीगत व्यय में अभूतपूर्व वृद्धि के साथ पीएम गति शक्ति के जरिए राजमार्गों, रेलवे और लॉजिस्टिक्स को मजबूती दी गई। विनिर्माण में पीएलआई योजनाओं ने मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उत्पादन को गति दी, जबकि अंतरिक्ष क्षेत्र में चंद्रयान-3 ने भारत की वैज्ञानिक प्रगति को नई पहचान दिलाई।

विदेश नीति और सुरक्षा के मोर्चे पर आतंकवाद के प्रति कठोर रुख और 2019 में अनुच्छेद 370 के संदर्भ में लिया गया निर्णय प्रमुख रहा। कूटनीतिक पटल पर भारत ने जी-20 की अध्यक्षता, क्वाड, ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ के माध्यम से विकासशील देशों के मुद्दों को दृढ़ता से उठाया। संस्कृति, योग और पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ घरेलू स्तर पर तीर्थ स्थलों का विकास कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दी गई। इस 25 वर्षीय प्रशासनिक सफर का वास्तविक मूल्यांकन उपलब्धियों के साथ-साथ रोजगार, क्षेत्रीय समानता और समावेशी विकास की चुनौतियों के संदर्भ में ही पूर्ण होता है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के आधार स्तंभ हैं।

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