बुधवार को भारत और घाना ने अकरा में कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही दोनों देशों ने स्वास्थ्य, रक्षा, दवा उद्योग (फार्मास्यूटिकल्स), खनन, रेलवे और डिजिटल तकनीक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी के विस्तार पर भी गहन विचार-विमर्श किया।
घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुद्जेटो अबलाकवा के साथ उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से हुई अपनी भेंट का उल्लेख किया। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने में राष्ट्रपति महामा के खुले और दूरदर्शी दृष्टिकोण के प्रति आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने कहा कि उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बीते वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक घाना यात्रा के दौरान बनी सहमतियों को गति देना और द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना है।
दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और घाना ‘ग्लोबल साउथ’ शब्दावली के चलन में आने से पहले से ही इसके स्वाभाविक समर्थक रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्रों ने पूर्व-औपनिवेशिक देशों की संप्रभुता, स्वावलंबन और सम्मान के लिए वैश्विक मंचों पर निरंतर आवाज उठाई है। उनके अनुसार, यह साझी विरासत और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वर्तमान संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने का मजबूत आधार प्रदान करती है।
बैठक के दौरान दोनों देशों में चल रही विकासात्मक योजनाओं की समानताओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने बताया कि घाना की स्वास्थ्य योजनाओं और भारत की ‘आयुष्मान भारत’ पहल में काफी समानताएं हैं। इसी तरह, खाद्य सुरक्षा को समर्पित ‘फीड घाना’ अभियान का मिलान भारत के मिलेट्स (मोटे अनाज) संवर्धन और किसान समृद्धि कार्यक्रमों से होता है। इसके अतिरिक्त, घाना के दस लाख कोडर तैयार करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तथा भारत के ‘डिजिटल इंडिया’ व ‘स्टार्ट-अप’ अभियानों के बीच अनुभव साझा करने की संभावनाओं पर बल दिया गया।
विदेश मंत्री ने घाना में मौजूद भारतीय समुदाय और व्यापारिक वर्ग की सराहना करते हुए उन्हें दोनों मुल्कों के बीच का एक “जीवंत सेतु” बताया। उन्होंने कहा कि हालिया महीनों में फार्मास्युटिकल, चिकित्सा, पोल्ट्री और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारतीय उद्यमियों द्वारा बड़े निवेश के संकल्प लिए गए हैं। जयशंकर ने विश्वास जताया कि आज के चुनौतीपूर्ण और उथल-पुथल भरे वैश्विक दौर में यह साझेदारी समावेशी विकास को गति देगी और इसका सीधा लाभ दोनों देशों के आम नागरिकों तक पहुंचेगा।