नवरात्रि के पावन अवसर पर चेन्नई पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए देश की युवा शक्ति का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आज की युवा पीढ़ी भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की मुख्य आधारशिला है, जिसके नए विचार और नवाचार न केवल देश बल्कि समूचे विश्व का भविष्य तय करने में सक्षम हैं। कार्यक्रम में निर्धारित समय से देर से पहुंचने पर विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से क्षमा मांगते हुए उन्होंने कहा कि शिव और शक्ति की पावन धरा तमिलनाडु में विद्यार्थियों के बीच उपस्थित होना उनके लिए अत्यंत विशेष है।
संस्थान की पांच दशकों की यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 1975 में चेन्नई के वेस्ट माम्बलम में मात्र सात विद्यार्थियों और सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुआ यह प्रयास आज दृढ़ संकल्प के बल पर 15 शैक्षिक संस्थानों का रूप ले चुका है। उन्होंने विद्यालय के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले जयगोपाल गारोडिया, शिक्षकों और पूर्व छात्रों के समर्पण की सराहना की। इस दौरान उन्होंने ‘मन की बात’ में साझा की गई उस प्रेरक पहल का स्मरण कराया, जिसमें गिरिजा शेषाद्रि के विचार से प्रेरित होकर विद्यार्थियों ने प्रतिदिन एक रुपये की बचत कर देश के सैनिकों के लिए 40 लाख रुपये की राशि जुटाई थी। उन्होंने आपदा राहत और स्वच्छता जैसे सामाजिक दायित्वों को इस संस्थान की स्थायी पहचान बताया।
तमिल साहित्य और दर्शन को युवाओं का मार्गदर्शक बताते हुए प्रधानमंत्री ने संत तिरुवल्लुवर के ‘तिरुक्कुरल’ का उल्लेख किया और कहा कि यह ग्रंथ जीवनपर्यंत सीखते रहने और ज्ञान को आचरण में उतारने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में उन्हें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट करने का अवसर मिला था। वहीं, महाकवि सुब्रमण्यम भारतियार के काशी प्रवास और आध्यात्मिक चेतना का उल्लेख करते हुए उन्होंने उनकी प्रसिद्ध कविता ‘अच्चमिल्लै, अच्चमिल्लै’ के माध्यम से युवाओं को भयमुक्त होकर सोचने का संदेश दिया। नब्बे के दशक की शुरुआत में कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गई ‘एकता यात्रा’ और गिरिजा शेषाद्रि से अपनी पहली भेंट को याद करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से देश भर में यात्रा करने, विविधता को अपनाने और तमिल संस्कृति व परंपराओं को पूरे भारत में प्रसारित करने की अपील की।
देश के शैक्षणिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 750 विश्वविद्यालय थे, जो अब बढ़कर 1,300 से अधिक हो चुके हैं। इसी अवधि में कॉलेजों की संख्या भी 38,000 से बढ़कर 52,000 के पार पहुंच गई है। इसके साथ ही देश भर में नए आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटी और एम्स स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी होने से शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हुई है, जिसके परिणामस्वरूप क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में भारतीय विश्वविद्यालयों की संख्या 2015 के 14 से उछलकर अब 52 हो गई है।
खेलों को करियर के रूप में चुनने वाले युवाओं के लिए प्रशिक्षण और अधोसंरचना के विस्तार की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। अंत में, उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण, दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने, आत्मनिर्भरता, वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और चंद्रमा पर भारतीय नागरिक को भेजने जैसे राष्ट्रीय संकल्पों को दोहराते हुए युवाओं से विकसित तमिलनाडु और विकसित भारत के साझा लक्ष्य के लिए एकजुट होकर काम करने का आग्रह किया।