प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में लगभग 13,000 करोड़ रुपये के विविध विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब राज्य समृद्ध होंगे, तभी राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का संकल्प साकार हो सकेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि ये परियोजनाएं राज्य में आवागमन को सुगम बनाएंगी, औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार देंगी और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर आजीविका के साधन जुटाएंगी।
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश में आधुनिक नगरीय परिवहन के तेजी से बदलते परिदृश्य का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सुनियोजित शहरीकरण को समस्या के स्थान पर संभावना के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें सार्वजनिक यातायात जीवन को सुलभ बनाने का मुख्य आधार है। पिछले दस वर्षों के बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश के मात्र 5 नगरों में 250 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो सेवा सीमित थी, जबकि वर्तमान में यह विस्तार 25 शहरों में 1,100 किलोमीटर से अधिक के नेटवर्क तक पहुंच चुका है। इसी कड़ी में चेन्नई मेट्रो के नए खंड को भी जनता को सौंपा गया।
औद्योगिक मोर्चे पर राज्य की क्षमता की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि ‘मेक इन इंडिया’ और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाली नीतियों से विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है। आज भारत विश्व स्तर पर मोबाइल निर्माण में दूसरे पायदान पर पहुंच चुका है। वर्ष 2014 की तुलना में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना तथा रक्षा सामग्री के निर्यात में 50 गुना का उल्लेखनीय उछाल दर्ज हुआ है। उन्होंने तमिलनाडु में आधारशिला रखे गए ‘एडवांस्ड लुब्रिकेंट बेस ऑयल’ प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इससे न केवल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, बल्कि विदेशी निर्भरता और आयात में भी कमी आएगी।
तटीय और समुद्री अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में केंद्र के प्रयासों की चर्चा करते हुए उन्होंने थूथुकुडी स्थित वीओसी (VOC) पोर्ट का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने जानकारी दी कि लगभग 17,000 करोड़ रुपये की लागत से इस बंदरगाह को विश्वस्तरीय ग्रीन एनर्जी और विशाल कंटेनर हब के रूप में रूपांतरित किया जा रहा है, जिससे दुनिया के विशालतम मालवाहक जहाजों की आवाजाही संभव होगी। बंदरगाहों पर माल उतारने-चढ़ाने की अवधि (टर्नअराउंड टाइम) घटने से व्यापारिक दक्षता बढ़ी है। साथ ही, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, चेन्नई फिशिंग हार्बर के आधुनिकीकरण, सी-वीड पार्क की स्थापना और किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए पूंजी की व्यवस्था से मछुआरों को सीधा लाभ पहुंचा है, जिससे पिछले वर्ष समुद्री खाद्य निर्यात ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया।
अपने प्रशासनिक सफर को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रमुख के तौर पर उन्होंने 25 वर्ष पूरे किए हैं, जिसकी शुरुआत अक्टूबर 2001 में मुख्यमंत्री पद की शपथ से हुई थी। उन्होंने बताया कि इस लंबी अवधि में जनशक्ति और सहकारी संघवाद पर उनका भरोसा निरंतर दृढ़ हुआ है। तमिलनाडु के संदर्भ में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि और जे. जयललिता से लेकर ओ. पन्नीरसेल्वम, ई. पलानीस्वामी तथा वर्तमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के साथ मिलकर कार्य करने के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि शासन बदलने के बावजूद राज्य के हित के प्रति उनका संकल्प अटल रहा है।
कार्यक्रम से पूर्व प्रधानमंत्री ने वेल्लोर के जलकंडेश्वर मंदिर में दर्शन किए, आईआईटी मद्रास के ब्रेन रिसर्च सेंटर का अवलोकन किया तथा जननायक जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्रों से लेकर अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और मेट्रो तक का यह दृश्य नए भारत के संतुलन को प्रदर्शित करता है, जहां सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक विज्ञान साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने तमिलनाडु को हरसंभव केंद्रीय सहयोग का भरोसा देते हुए प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं।