रविवार को तमिलनाडु में जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी ‘विकसित भारत’ के निर्माण की सबसे प्रमुख आधारशिला है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के युवाओं की नई सोच और नवोन्मेषी समाधान न केवल भारत के विकास में सहायक होंगे, बल्कि समूचे विश्व के भविष्य को भी नई दिशा प्रदान करेंगे।
नवरात्रि के पावन अवसर के पहले दिन शिव और शक्ति की भूमि तमिलनाडु पहुंचने को विशेष बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्ञान की देवी मां सरस्वती के साधक विद्यार्थियों से संवाद करना इस पर्व की उत्कृष्ट शुरुआत है। विद्यालय के बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास में ही राष्ट्र का कल झलकता है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश में मौजूद असीम संभावनाओं का लाभ उठाकर अपने लक्ष्यों का दायरा व्यापक करें, क्योंकि आज विश्व जिन वैश्विक समस्याओं के हल तलाश रहा है, उन्हें उपलब्ध कराने का सामर्थ्य भारत के प्रतिभाशाली युवाओं में है।
जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय की पांच दशक की यात्रा को प्रेरणाप्रद करार देते हुए प्रधानमंत्री ने संस्थापक जयगोपाल गरोडिया के समर्पण के साथ ही शिक्षकों, कर्मचारियों और पूर्व छात्रों के योगदान को नमन किया। उन्होंने स्मरण कराया कि संसाधनों के अभाव और सीमित सुविधाओं के बीच यह संस्थान कभी महज सात छात्रों के साथ शुरू हुआ था, लेकिन निष्ठा और अटूट सेवाभाव ने इसे यह मुकाम दिलाया। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘मन की बात’ का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे गिरिजा अम्मा की एक रुपये रोज बचाने की सीख पर अमल करते हुए बच्चों ने सैनिकों की मदद के लिए लगभग 40 लाख रुपये एकत्र किए थे। उन्होंने कहा कि यह प्रयास इस बात का साक्ष्य है कि जनभागीदारी का एक छोटा कदम भी व्यापक बदलाव की नींव रख सकता है।
संत तिरुवल्लुवर के ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने हाल ही में इसका रूसी अनुवाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेंट किया था। उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ उसे आचरण में उतारना भी उतना ही आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने देश में शैक्षणिक विस्तार के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि 2014 में देश में लगभग 750 विश्वविद्यालय और 38 हजार कॉलेज थे, जो अब बढ़कर क्रमशः 1,300 से अधिक और 52 हजार के पार पहुंच चुके हैं। नए आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी और एम्स की स्थापना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 के ओलंपिक की मेजबानी की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जिससे युवाओं के लिए खेल, नवाचार और विकास के नए द्वार खुल रहे हैं।