एशियन गेम्स 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदक विजेताओं को सराहा, 2036 ओलंपिक मेजबानी और ग्लोबल स्पोर्ट्स हब का रखा विजन

एशियन गेम्स 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदक विजेताओं को सराहा, 2036 ओलंपिक मेजबानी और ग्लोबल स्पोर्ट्स हब का रखा विजन

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 में भाग लेकर लौटे भारतीय दल को संबोधित करते हुए खिलाड़ियों के ऐतिहासिक प्रदर्शन की सराहना की। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर आयोजित इस अभिनंदन समारोह में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दल द्वारा जीते गए 85 पदक केवल व्यक्तिगत विजय नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का सामूहिक गौरव हैं। इस दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे की उपस्थिति में उन्होंने खिलाड़ियों से विभिन्न राष्ट्रीय व खेल लक्ष्यों पर ‘वी विल डू इट’ का संकल्प भी कराया।

प्रधानमंत्री ने भारतीय दल की ऐतिहासिक सफलताओं का ब्योरा देते हुए महिला खिलाड़ियों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कुल 85 पदकों में से 38 पदक देश की बेटियों ने जीते हैं, जिनमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं। हॉकी स्पर्धा में पुरुष और महिला दोनों टीमों के स्वर्ण पदक जीतने का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि महिला हॉकी टीम ने 44 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह स्वर्णिम सफलता हासिल की है। इसके अतिरिक्त, क्रिकेट में पुरुष व महिला टीमों ने लगातार दूसरी बार पदक जीतकर अपने पिछले रिकॉर्ड की बराबरी की, जबकि कबड्डी में भी दोनों वर्गों में देश को स्वर्ण पदक प्राप्त हुए। तीरंदाजी में पांच स्वर्ण, निशानेबाजी, मुक्केबाजी और कुश्ती में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ-साथ एथलेटिक्स में नए कीर्तिमान बने। भारत ने 28 साल बाद भारोत्तोलन और 1982 के बाद पहली बार मैराथन में पदक हासिल किया, वहीं मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, सॉफ्ट टेनिस और सेलिंग जैसी स्पर्धाओं में देश ने पहली बार पदक जीतकर इतिहास रचा।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दल में शामिल 15 से 17 वर्ष के किशोर खिलाड़ियों की सफलता यह दर्शाती है कि प्रतिभा के लिए आयु कोई बाधा नहीं होती। उन्होंने बताया कि सरकार अब 5 से 15 वर्ष के बच्चों में प्रारंभिक स्तर पर खेल प्रतिभा की पहचान करने पर विशेष ध्यान दे रही है। मेजर ध्यानचंद के अनुशासन और रात्रि अभ्यास के समर्पण का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि सफलता निरंतर परिश्रम और धैर्य से ही संभव होती है। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में खेल व्यवस्था से निराशावादी सोच को हटाकर एक आधुनिक और पारदर्शी तंत्र विकसित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप भारत की वैश्विक भागीदारी और प्रदर्शन में व्यापक सुधार आया है।

देश के खेल ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि खेलो इंडिया योजना के विस्तार और खेल महासंघों को सशक्त करने के लिए 36,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का आवंटन किया गया है। वर्तमान में 1,000 से अधिक खेलो इंडिया केंद्र संचालित हैं और देश भर में आधुनिक स्टेडियम, मिनी स्टेडियम, मल्टी-पर्पज हॉल, ट्रैक तथा स्विमिंग पूल तैयार किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों को आउट-ऑफ-पॉकेट भत्ते के साथ-साथ ‘टॉप्स’ (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) के तहत 50 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता और विदेशी कोचिंग की सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही विंटर गेम्स, सांसद खेल स्पर्धाएं, नई खेल नीति, खेलो भारत नीति और दिव्यांग एथलीटों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

भविष्य के लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक, 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी और 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने की राष्ट्रीय आकांक्षा को दोहराया। उन्होंने लाल किले से घोषित प्रतिभा खोज अभियान का हवाला देते हुए कहा कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से नई खेल प्रतिभाओं को तराशा जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि जिस तरह देश विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना है और युवा अंतरिक्ष, रक्षा व एआई में नए प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं, उसी तरह खेल, कोचिंग, फिजियोथेरेपी और स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में भी नए रोजगार निर्मित हो रहे हैं।

अंत में प्रधानमंत्री ने ‘जो खेलेगा, वो खिलेगा’ का मंत्र दोहराते हुए खिलाड़ियों से अपने गृह नगरों, गांवों और प्राथमिक खेल मैदानों में जाकर बच्चों को प्रेरित करने का आग्रह किया। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने खिलाड़ियों के साथ 2047 तक विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, शीर्ष तीन वैश्विक अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी नेतृत्व और ओलंपिक मेजबानी के संकल्पों के साथ ‘वी विल डू इट’ का सामूहिक उद्घोष किया।

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