रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के सेबू शहर में ‘आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम-प्लस)’ को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए आपसी विश्वास तथा सामूहिक उत्तरदायित्व अनिवार्य हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि साझा इच्छाशक्ति के बल पर ही वर्तमान दौर की गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से निपटा जा सकता है।
संबोधन में रक्षा मंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए नियम-आधारित व्यवस्था और आसियान की केंद्रीय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आसियान देशों के साथ भारत के रिश्ते व्यावहारिक साझेदारी और परस्पर सम्मान की मजबूत नींव पर खड़े हैं, जिसका लक्ष्य पूरे क्षेत्र का संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।
सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आतंकवाद विरोधी नीतियां वास्तविक अभियानों में पूरी तरह खरी उतरी हैं। पिछले साल संपन्न ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार आतंकी ढांचे को ध्वस्त कर भारत ने सीमा पार प्रायोजित आतंक पर कड़ा प्रहार किया था। उन्होंने कहा कि भारत अपने सहयोगी देशों के साथ संयुक्त अभ्यास, तकनीकी क्षमता विस्तार और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के जरिए सामूहिक सुरक्षा तंत्र को और सशक्त बनाने के लिए तत्पर है।
वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 से अदन की खाड़ी में तैनात भारतीय युद्धपोतों ने समुद्री डकैती और अपहरण के प्रयासों को विफल कर हजारों व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की है। भारत संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून कन्वेंशन के अनुसार जल और नभ में आवागमन की स्वतंत्रता का समर्थन करता है ताकि सभी भागीदार देशों के साझा व्यापारिक हित सुरक्षित रहें।
भारत और आसियान के भविष्य को मजबूती देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री ने एक रक्षा ‘यूथ ब्रिज’ के गठन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत और आसियान दोनों की मुख्य शक्ति उनकी विशाल युवा आबादी है। यह प्रस्तावित मंच दोनों क्षेत्रों के युवाओं के बीच सीधा संपर्क, तकनीकी नवाचार और रक्षा कौशल को प्रोत्साहित करेगा, जिससे आने वाली पीढ़ी क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की स्थायी संवाहक बन सके।