कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के व्यापक सुधारों और सरकारी योजनाओं के विस्तार के चलते भारत में सामाजिक सुरक्षा का राष्ट्रीय कवरेज वर्ष 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2026 में 68.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इस तेज बढ़ोतरी के साथ देश की एक अरब से अधिक आबादी भविष्य निधि, पेंशन और जीवन बीमा के औपचारिक संरक्षण में आ चुकी है। नीतिगत प्राथमिकताओं में संगठित क्षेत्र के साथ-साथ असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स और पेंशनरों को जीवन के विभिन्न चरणों में वित्तीय संबल प्रदान करना शामिल रहा है।
बदलते आर्थिक परिवेश में आय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन कार्यरत ईपीएफओ एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। यह संस्थान ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई के त्रिपक्षीय ढांचे पर संचालित होता है। जहां ईपीएफ सेवानिवृत्ति के लिए कोष तैयार करता है, वहीं ईपीएस के जरिए सदस्य अथवा उसकी मृत्यु उपरांत परिजनों को पेंशन मिलती है। सेवाकाल के दौरान आकस्मिक निधन होने पर ईडीएलआई योजना के अंतर्गत बिना किसी कर्मचारी प्रीमियम के अधिकतम 7 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
सदस्यता और सेवाओं के आंकड़ों में पिछले एक दशक में भारी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2014-15 के 3.49 करोड़ अंशदाताओं की तुलना में 16 सितंबर 2026 तक योगदानकर्ता सदस्यों की संख्या 7.98 करोड़ और योगदान देने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 7.68 लाख तक पहुंच गई। ईपीएस पेंशनभोगियों की संख्या भी 51.04 लाख से बढ़कर सितंबर 2026 तक करीब 82 लाख हो गई। अक्टूबर 2026 तक बीते एक वर्ष के दौरान रिकॉर्ड 6.42 करोड़ दावों का निपटारा किया गया। इसके अलावा, सितंबर 2026 में अनिवार्य कवरेज हेतु मासिक वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई, जिससे 51 लाख नए कर्मचारियों को योजना से जोड़ा जा सकेगा।
प्रक्रियाओं को पारदर्शी व सरल बनाते हुए ईपीएफओ ने आंशिक निकासी के 13 नियमों को अनिवार्य खर्च, आवास और विशेष परिस्थितियों के तीन वर्गों में बांट दिया है। अब शिक्षा हेतु 10 और विवाह के लिए 5 बार आंशिक निकासी की जा सकती है। 12 महीने की न्यूनतम सेवा पूरी होने पर पात्र सदस्य अपने कुल शेष का 75 फीसदी तक निकाल सकते हैं। 5 लाख रुपये तक के पात्र अग्रिम दावों का निपटारा अब बिना मानवीय हस्तक्षेप के ऑटो-मोड पर हो रहा है, और बैंक पासबुक या चेक की प्रति देने की शर्त भी हटा दी गई है। विवादों को घटाने के लिए ‘विश्वास, 2026’ और अपंजीकृत ट्रस्टों की नियमितता के लिए 28 दिसंबर 2026 तक प्रभावी ‘एमनेस्टी, 2026’ जैसी योजनाएं क्रियान्वित की गई हैं।
डिजिटल नवाचारों के तहत यूएएन जनरेशन और एक्टिवेशन को फेस ऑथेंटिकेशन व उमंग ऐप से जोड़ा गया है, जहां अक्टूबर 2026 तक 1.74 करोड़ स्व-जनित यूएएन बने। केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (सीपीपीएस) के लागू होने से पेंशनभोगी बिना पीपीओ ट्रांसफर कराए देश की किसी भी बैंक शाखा से पेंशन लेने के लिए स्वतंत्र हैं। आईपीपीबी के साथ मिलकर 50 रुपये प्रति जीवन प्रमाणपत्र का वित्तीय भार ईपीएफओ स्वयं वहन कर वृद्धों को घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र उपलब्ध करा रहा है। आगामी ‘ईपीएफओ 3.0’ पहल के जरिए कोर बैंकिंग और क्लाउड तकनीकों को जोड़कर दावा निपटान अवधि को 20 दिनों से घटाकर अधिकतम 3 दिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
सामाजिक सुरक्षा की यह व्यवस्था केवल औपचारिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के माध्यम से वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगों को मासिक आर्थिक मदद तथा परिवार के मुखिया की असामयिक मृत्यु पर 20,000 रुपये की एकमुश्त सहायता दी जाती है। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 ने गिग व असंगठित कामगारों को कानूनी सुरक्षा, सावधि कर्मियों को अनुपातिक ग्रेच्युटी और कामकाजी महिलाओं को 26 सप्ताह के मातृत्व लाभ का अधिकार दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर अगस्त 2026 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31.89 करोड़ कामगार पंजीकृत हो चुके हैं, वहीं 18-40 वर्ष आयु के पात्र असंगठित श्रमिकों के लिए ‘पीएम श्रम योगी मानधन योजना’ के तहत 60 वर्ष की आयु उपरांत 3,000 रुपये मासिक सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान सुचारु रूप से जारी है।