प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 151वीं जयंती पर नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता और प्रगति में सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के उपरांत 550 से अधिक देशी रियासतों का विलय कर सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से एकीकृत भारत का निर्माण किया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि नागरिकों का पारस्परिक सद्भाव और देश की एकता ही आज भारत का सबसे मजबूत आधार है।
इस बार राष्ट्रीय एकता दिवस के प्रारूप में आवश्यक बदलाव किया गया। पूर्व के वर्षों में यह आयोजन सुबह संपन्न होता था, लेकिन इस वर्ष ‘रन फॉर यूनिटी’ और संबंधित आयोजनों को ध्यान में रखते हुए मुख्य समारोह का समय शाम को तय किया गया। इससे पहले सुबह देश के विभिन्न हिस्सों में लाखों लोगों ने एकता दौड़ में भाग लिया, जिसमें युवाओं की सक्रिय सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसे राष्ट्र का हिस्सा होने पर प्रत्येक नागरिक गौरवान्वित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गणतंत्र जहां जनसाधारण के प्रति जिम्मेदारी तय करता है, वहीं एकता राष्ट्र को प्रगति पथ पर ले जाने की ऊर्जा देती है; इसी कारण स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस की तरह ही एकता दिवस को भी राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
आर्थिक और वैश्विक संदर्भों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि पूर्व में दिए गए नारों के बावजूद गरीबी बनी रही, परंतु हाल के वर्षों में ठोस सुधार दर्ज किए गए हैं। उन्होंने विश्व बैंक के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2024 से पहले के 10 से 12 वर्षों के भीतर 50 करोड़ देशवासी निर्धनता रेखा से बाहर आए हैं। पूर्व में जहां देश की 27 प्रतिशत से अधिक आबादी अत्यंत विषम गरीबी का सामना कर रही थी, वहीं अब यह दर घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गई है। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक संघर्षों, आपूर्ति शृंखला पर बढ़ते दबाव तथा आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे दौर में भारत का आपसी भाईचारा ही संकटमोचक सिद्ध होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई देशों में ईंधन की कमी और राशनिंग के विपरीत भारत ने अपनी विशाल आबादी को वैश्विक ऊर्जा संकट के असर से सुरक्षित रखा।
समारोह के मुख्य आकर्षण के तहत आयोजित एकता परेड में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), राज्य पुलिस और केंद्रीय संगठनों ने अपना सामर्थ्य प्रस्तुत किया। परेड में आंतरिक सुरक्षा और विशेषकर वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध अभियानों में सुरक्षा बलों के योगदान को प्रमुखता दी गई। इसमें नौ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 16 मार्चिंग टुकड़ियों के अलावा चार सीएपीएफ, एनसीसी और मार्चिंग बैंड ने हिस्सा लिया। एनएसजी की ‘हेल मार्च’ टुकड़ी, बीएसएफ तथा सीआरपीएफ के महिला व पुरुष कार्मिकों के मोटर साइकिल करतब, बीएसएफ का मार्शल आर्ट प्रदर्शन, स्कूली छात्रों का पाइप बैंड और वायुसेना के ‘सूर्य किरण’ विमानों का फ्लाईपास्ट दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे।
इस वर्ष के आयोजन में ‘नक्सल मुक्त भारत’ की संकल्पना पर विशेष जोर दिया गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, परेड में माओवादी हिंसा के विरुद्ध अग्रिम मोर्चे पर डटे रहने वाले बलों को शामिल किया गया और उनकी वीरता पर केंद्रित लघु फिल्में प्रदर्शित की गईं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा प्रस्तुत विशेष नाट्य मंचन में कभी उग्रवाद प्रभावित रहे 126 जिलों के करीब 2,000 कलाकारों ने हिस्सा लेकर क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाया; इन जिलों के 5,000 नागरिक भी दर्शक के तौर पर उपस्थित रहे। सांस्कृतिक आयोजनों की मुख्य विषयवस्तु ‘वंदे मातरम्’ रही, जिसमें देश भर के 5,000 कलाकारों ने क्षेत्रीय लोक कलाओं के जरिए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मंच पर साकार किया।
समारोह में भाग लेने से पूर्व प्रधानमंत्री ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर सरदार पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने एकता नगर में पर्यटन और ढांचागत विकास से जुड़ी 426.71 करोड़ रुपये मूल्य की 31 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया, जिनमें रेन फॉरेस्ट, इको ट्रेल, आईआरसीटीसी होटल और नर्मदा घाटों का आधुनिकीकरण शामिल है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर मनाया जाने वाला यह दिवस एकता नगर को राष्ट्रीय संकल्प और सांस्कृतिक समन्वय के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करता है।