केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के औपचारिक समापन पर घोषणा की कि नक्सल समस्या से मुक्ति पाने के बाद राज्य अब तेज विकास और विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने शांति स्थापना की इस बड़ी कामयाबी का श्रेय केंद्रीय सुरक्षा बलों और प्रांतीय पुलिस के जवानों को देते हुए आदिवासी समुदाय की भूमिका की सराहना की। इस अवसर पर मंच पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा मौजूद थे।
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से नवा रायपुर में 5 लाख पीपल के वृक्ष लगाकर उसे एक मॉडल ‘पीपल सिटी’ के रूप में स्थापित करने की योजना प्रस्तुत की गई। अमित शाह ने सन 2000 में राज्य की नींव रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिस प्रदेश का गठन वाजपेयी जी ने किया था, उसे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य ने अपनी पुरानी उपेक्षा को पीछे छोड़कर विकसित होने का संकल्प लिया है।
सांस्कृतिक धरोहरों का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि गुरु घासीदास और गुरु नानक देव के समानता और सत्य के संदेश राज्य की आत्मा हैं। बस्तर ओलंपिक और छत्तीसगढ़ पंडुम जैसी पहलों से लोक नृत्यों—जैसे राउत नाचा, पंथी, पांडवानी—और पारंपरिक हस्तशिल्पों को नया जीवन मिल रहा है। उन्होंने 75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरे की निरंतरता को भी रेखांकित किया।
अमित शाह ने कहा कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के शुरुआती दो महीनों में ही नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया था। उन्होंने बताया कि बारूदी सुरंगों और हिंसा की वजह से दशकों तक जंगलों और स्कूलों का बुनियादी ढांचा प्रभावित रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की स्पष्ट नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले 90 फीसदी लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा गया, जबकि संघर्ष जारी रखने वाले 10 फीसदी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए। उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर आकर आदिवासियों की पीड़ा को समझने का आग्रह किया।
संसदीय मर्यादाओं और शासन पर बोलते हुए उन्होंने विपक्ष को संसद के पटल पर तर्कसंगत चर्चा करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने 70 फीसदी से अधिक गारंटियों को अल्पकाल में ही पूरा कर दिखाया है, जिसमें महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त का भुगतान प्रमुख है। इसके साथ ही कृषि, वनोपज और उद्योग क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं।
अंत में उन्होंने अनुमान व्यक्त किया कि चित्रकूट, तीरथगढ़ और प्रमुख देवी स्थलों के प्रभाव से राज्य देश के तीन अग्रणी पर्यटन स्थलों में स्थान पाएगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी के साथ साक्षरता दर 79 फीसदी पहुंच गई है। इन ठोस बदलावों के दम पर अगले एक दशक में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ यहां का हर नागरिक आर्थिक रूप से सशक्त बनेगा।